आज तुम याद बेहिसाब आए

अजीज अंसारी|
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं ------फ़ैज़

कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बेहिसाब आए--------------फ़ैज़

यूँ तो हिलता ही नहीं घर से किसी वक़्त 'अदम'
शाम के वक़्त न मालूम किधर जाता है ------------'अदम'

आइये कोई नेक काम करें
आज मौसम बड़ा गुलाबी है ------'अदम'
रात बाक़ी थी जब वो बिछड़े थे
कट गई उम्र रात बाक़ी है --------ख़ुमार

मेरी क़िस्मत में ग़म गर इतना था
दिल भी यारब कई दिए होते ----------ग़ालिब

ठानी थी दिल में अब न मिलेंगे किसी से हम
पर क्या करें के हो गए नाचार जी से हम -------मोमिन
तुम मेरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता --------मोमिन

तेरे कूंचे इस बहाने मुझे दिन से रात करना
कभी इससे बात करना, कभी उससे बात करना----मसहफ़ी

मसहफ़ी हम तो ये समझे थे के होगा कोई ज़ख़्म
तेरे दिल में तो बहुत काम रफ़ू का निकला --------मसहफ़ी
हम हुए तुम हुए के हुए
उसकी ज़ुल्फ़ों के सब असीर हुए--------मीतक़ी मीर

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