सब्र कर

WD| पुनः संशोधित रविवार, 1 सितम्बर 2013 (16:17 IST)
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भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ,
आजकल दिल्ली में है, जे़रे बहस ये मद्दुआ
गिड़गिड़ाने का यहां कोई असर होता नहीं,
पेट भरकर गालियां दो, आह भरकर बद्दुआ।

-दुष्‍यंत कुमार

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