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जनम-जनम का रिश्ता

शुक्रवार,नवंबर 29, 2013
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शुमार कर न अभी मेरा इन निगाहों में मैं इस हजूम से दामन बचा के निकलूंगा,
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आज का शेर : मेरी नज़र से

मंगलवार,अक्टूबर 22, 2013
मेरी नज़र से न हो दूर एक पल के लिए, तेरा वुजूद है लाज़िम मेरी ग़ज़ल के लिए।
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आज का शेर : ख़ुदा करे....

मंगलवार,सितम्बर 24, 2013
मिलेंगे अब हमें हर सू डरावने मंज़र, हमारे साथ वो आए,
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घर हो गए बर्बाद...

शुक्रवार,सितम्बर 20, 2013
कई घर हो गए बरबाद ख़ुद्दारी बचाने में ज़मीनें बिक गईं सारी ज़मींदारी बचाने में
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जनम-जनम का रिश्ता

मंगलवार,सितम्बर 17, 2013
कभी पा के तुझको खोना, कभी खो के तुझको पाना
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ये जनम जनम का रिश्ता

शनिवार,सितम्बर 14, 2013
मुझे रोक-रोक पूछा, तेरा हमसफ़र कहाँ है।
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आज का शेर

शनिवार,सितम्बर 14, 2013
मुझे रोक-रोक पूछा, तेरा हमसफ़र कहाँ है।
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ख़ुदा करे....

शुक्रवार,सितम्बर 13, 2013
ख़ुदा करे कि किसी को भी ऐसी प्यास न हो।
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तेरी याद से

गुरुवार,सितम्बर 12, 2013
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया,
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मशविरा

बुधवार,सितम्बर 4, 2013
मेरी जां इस क़दर अंधे कुएं में भला यूं झांकने से क्या दिखेगा
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सरासर भूल

बुधवार,सितम्बर 4, 2013
सरासर भूल करते हैं उन्‍हें जो प्‍यार करते हैं, बुराई कर रहे हैं और अस्वीकार करते हैं
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काग़ज़ भिगो गईं आंखें

बुधवार,सितम्बर 4, 2013
तुझको सोचा तो खो गईं आंखें, दिल का आईना हो गईं आंखें
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क़दमों की आहट

बुधवार,सितम्बर 4, 2013
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं, तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
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क़दमों की आहट

सोमवार,सितम्बर 2, 2013
बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं, तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
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सब्र कर

रविवार,सितम्बर 1, 2013
भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ, आजकल दिल्ली में है, जे़रे बहस ये मद्दुआ
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झुनझुने

रविवार,सितम्बर 1, 2013
बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं, और नदियों के किनारे घर बने हैं
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अजब कुछ हाल है

रविवार,सितम्बर 1, 2013
कमर बांधे हुए चलने को यों तैयार बैठे हैं, बहुत आगे गए, बाक़ी जो हैं तैयार बैठे हैं
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नया आसमां

रविवार,सितम्बर 1, 2013
कोई नई ज़मीं हो, नया आसमां भी हो, ऐ दिल अब उसके पास चलें, वो जहां भी हो
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सहन में रस्‍ते

रविवार,सितम्बर 1, 2013
दीवार क्‍या गिरी मेरे ख़स्‍ता मकान की, लोगों ने मेरे सहन में रस्‍ते बना लिए।
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