क़दमों की आहट

WD| पुनः संशोधित सोमवार, 2 सितम्बर 2013 (17:45 IST)
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बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं,
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
तुझे घाटा न होने देंगे कारोबार-ए-उल्‍फ़त में,
हम अपने सर तेरा ऐ दोस्‍त हर इल्‍ज़ाम लेते हैं।

-फ़िराक़ गोरखपुरी

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