यह थी सांईं बाबा की अंतिम इच्छा, जानिए...

sai baba
हिन्दुओं में यह प्रथा प्रचलित है कि जब किसी मनुष्य का अंत काल निकट आ जाता है तो उसे धार्मिक ग्रंथ आदि पढ़कर सुनाए जाते हैं। मुख्य रूप से गीता सुनाए जाने का प्रचलन इसलिए है, क्योंकि वह वेदों का सार है और संक्षिप्त भी है।
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धर्मग्रंथ का कोई अध्याय या गीता को सुनाए जाने का प्रचलन इसलिए है ताकि व्यक्ति की बुद्धि से सांसारिक भावना छुटकर धार्मिक भावना का विकास हो और उसे सद्गति प्राप्त हो। कहते ‍हैं कि अंत काल में अच्छी भावनाओं को मन में भर लेना चाहिए, क्योंकि व्यक्ति जिस भावना से देह छोड़ता है उसे वैसी ही गति मिलती है और उस गति के अनुसार ही उसे वैसा ही दूसरा जीवन मिलता है।
 
हालांकि यह भी सच है कि सांईं बाबा तो एक सिद्ध योगी थे। उनके लिए किसी भी धर्मग्रंथ को सुनना जरूरी नहीं था फिर भी उन्होंने अपने भक्तों के समक्ष यह इच्‍छा प्रकट की थी। अब सवाल यह है कि कौन सा धर्मग्रंथ सुनें? 
 
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