साईं बाबा की 7 अद्भुत प्रतिमाएं

sai baba
साईं बाबा का पहला मंदिर उनके भक्त केशव रामचंद्र प्रधान ने बनवाया था। उनका दूसरा मंदिर शिरडी में है जहां उन्होंने समाधि ली थी। उनका तीसरा मंदिर महाराष्ट्र के परभणी जिले के पाथरी गांव में हैं जहां बाबा का जन्म हुआ था। आज देशभर में बाबा के मंदिर हैं‍ जिनमें से कुछ मंदिरों के प्रांगण में बाबा की विशालतम मूर्तियों को देखकर मन भावना से भर जाता है।
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भारत में बहुत से लोग वेदांती और सुन्नी हैं, जो दृढ़ता से एकेश्‍वरवादी हैं। वे उस एक ईश्वर के अलावा अन्य किसी के समक्ष झुकने को पाप मानते हैं। उनके लिए 'ब्रह्म ही सत्य है' या 'अल्लाह के अलावा और कोई अल्लाह नहीं।' यह दृढ़ता या कहें यह कायमी हमें समझ में आती है, अच्छी बात है और यह सत्य भी है, लेकिन जब यही दृढ़ लोग दूसरों को भी अपने जैसा बनाने की जोर-जबरदस्ती करते हैं तो फिर धार्मिकता सांप्रदायिकता में बदल जाती है
सांप्रदायिक होना आसान है, लेकिन धार्मिक होना बहुत मुश्किल। ध्यान, प्रार्थना, पूजा या नमाज पढ़ने से कोई धार्मिक बन जाता है तो यह बहुत ही आसान रास्ता है धर्म का। हमने तो पढ़ा और सुना है कि धर्म तो 'अग्निपथ' है। धर्म तो 'सत्य' है। सत्य का अर्थ आम बुद्धि के लिए समझना बहुत कठिन है।
 
सांप्रदायिकता के इस सबसे बुरे दौर में किसी धार्मिक व्यक्ति को खोजना बहुत ही मुश्किल है। जो लोग खुद को धर्मनिरपेक्ष या साम्यवादी कहते हैं वे गफलत में हैं या कहे कि वे उन लोगों में से हैं जिनका कोई धर्म नहीं है। यह नए तरह की सांप्रदायिकता है।
 
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