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11 उपाय...भारतीय संस्कृति बचाने के

Last Updated: शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017 (11:37 IST)
यदि आप भारतीय संस्कृति को प्यार करते हैं तो आपको रूढ़िवादी माना जाता है और यदि आप पाश्चात्य संस्कृति को बढ़ावा देते हैं तो आपको आधुनिक माना जाता है। ऐसे में तब हम उन लोगों को क्या मानें, जो पश्चिम के हैं और अपनी पाश्चात्य संस्कृति से प्यार करते हैं? दरअसल, हिन्दुस्तानी लोग पाश्चात्य और आधुनिक संस्कृति में फर्क करना नहीं जानते।
 
...भारतीय संस्कृति और सभ्यता की बात करें तो उसमें बहुत कुछ है जिसने दुनिया को सभ्य बनाया। समय के साथ सब कुछ बदलता रहता है लेकिन उनमें से कुछ बदलाव लाभदायक होते हैं और कुछ नुकसानदायक। कुछ बातों को छोड़ने से आपकी पहचान मिट जाती है और इसके दुष्परिणाम आपकी आने वाले पीढ़ियों को भुगतना होते हैं। 
 
आप जब भी संस्कृति और सभ्यता की बात करेंगे तो आपको निश्चित ही रूढ़िवादी या कट्टरवादी माना जाने लगेगा। ऐसी मानसिकता को आपके दिमाग में भरने वाले वे ही लोग हैं, जो आपकी संस्कृति और सभ्यता को आधुनिकता या बौद्धिकता के नाम पर समाप्त करना चाहते हैं। आपको अपने देश और संस्कृति से विद्रोह करना सिर्फ एक दिन में नहीं सिखाया गया है। यह तो सैकड़ों साल की गुलामी और बाजारवाद का परिणाम है।
 
जब हम भारतीय संस्कृति की बात करते हैं तो उसका हिस्सा सभी धर्म, जाति, प्रांत और समाज के लोग हैं। अत: संस्कृति को बचाना उन सभी लोगों की जिम्मेदारी है, जो खुद को भारतीय मानते हैं। आओ जानते हैं कि किस तरह बाजारवाद, साम्यवाद और आधुनिकता के बुरे प्रचलन के दौर में हम अपनी संस्कृति को बचाएं।
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