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मुख पृष्ठ » धर्म-संसार » सनातन धर्म (Sanatan Dharma)
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हिंदू आश्रम व्यवस्था को जानें
प्राचीन भारत में ऋषि-मुनि वन में कुटी बनाकर रहते थे। जहाँ वे ध्यान और तपस्या करते थे। उक्त जगह पर समाज के लोग अपने बालकों को वेदाध्यन के अलावा अन्य विद्याएँ सीखने के लिए भेजते थे। धीरे-धीरे यह आश्रम संन्यासियों, त्यागियों, विरक्तों धार्मिक यात्रियों और अन्य लोगों के लिए शरण स्थली बनता गया। यहीं पर तर्क-वितर्क और दर्शन की अनेकों धारणाएँ विकसित हुई।
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अनुभूति के चार स्तर
वेद और वेदांत अनुसार आत्मा होश के कुछ स्तर और उप-स्तर बताएँ गए है। पंचकोश या पंचतत्व से बंधी हुई आत्मा स्वयं को मूलत: त्रिस्तरों में पाती हैं। यहाँ वेद के इस गहन गंभीर ज्ञान को सरल भाषा में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
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शिव है धर्म का मूल
।।ॐ।। ओम नम: शिवाय।- 'ओम' प्रथम नाम परमात्मा का फिर 'नमन' शिव को करते हैं। 'सत्यम, शिवम और सुंदरम' जो सत्य है वह ब्रह्म है:- ब्रह्म अर्थात परमात्मा। जो शिव है वह परम शुभ और पवित्र आत्म तत्व है और जो सुंदरम है वही परम प्रकृति है। अर्थात परमात्मा, शिव और पार्वती के अलावा कुछ भी जानने योग्य नहीं है। इन्हें जानना और इन्हीं में लीन हो जाने का मार्ग है-हिंदुत्व।
• कर्तव्य है जीवन का आधार • यज्ञकर्म विज्ञान है कर्मकांड नहीं
• किसे कहते हैं सृष्टि? • नीति-नियम या व्यवस्था?
• आत्‍मा एव इदं सर्वम् • पितृयज्ञ: पितरों की तृप्ति