धर्म से मोक्ष और अर्थ से काम साध्य माना गया है। ब्रह्मचर्य और गृहस्थ जीवन में धर्म, अर्थ और काम का महत्व है। वानप्रस्थ और संन्यास में धर्म प्रचार तथा मोक्ष का महत्व माना गया है। ब्रह्मचर्य का अर्थ होता है ब्रह्म को चरना या ब्रह्म की चर्चा व चर्चा में ही रत रहना। दूसरा अर्थ जो प्रचलित है वह है इंद्रियों का संयम रखना। विद्यार्थी और सन्यासी का यह कर्तव्य है कि वह इंद्रियों पर संयम रखकर ईश्वर परायण रहे।