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महाभारत के कर्ण केवल शूरवीर या दानी ही नहीं थे अपितु कृतज्ञता, मित्रता, सौहार्द, त्याग और तपस्या का प्रतिमान भी थे। वे ज्ञानी, दूरदर्शी, पुरुषार्थी और नीतिज्ञ भी थे और धर्मतत्व समझते थे। वे दृढ़ निश्‍चयी और अपराजेय भी थे। सचमुच कर्ण का व्यक्तित्व रहस्यमय है।
 
 
 
 
सनातन हिन्दू धर्म में असत, अचेतन और अयोग्य की उपासना नहीं होती। असत अर्थात जिसने जन्म लिया और जिसका नाश हो गया। अचेतन अर्थात पत्थर, वृक्ष आदि सभी...
 
 
 
ऐसी मान्यता है कि हिन्दू देवी-देवताओं की संख्या 33 या 36 करोड़ है, लेकिन ये सच नहीं है। वेदों में देवताओं की संख्या 33 कोट‍ि बताई गई है। कोटि का अर्थ प्रकार होता...
 
 
 
वेद अनुसार जन्म और मृत्यु के बीच और फिर मृत्यु से जन्म के बीच तीन अवस्थाएं ऐसी हैं जो अनवरत और निरंतर चलती रहती हैं। वह तीन अवस्थाएं हैं : जागृत, स्वप्न...
 
 
 
वेद, पुराण और गीता पढ़ने के बाद हमने जाना कि ब्रह्मांड में सबसे बड़ी कौन-सी ताकत है। बहुत से लोग यह जानना चाहते होंगे। इसके लिए हमने क्रमवार कुछ खोजा है।
 
 
 
 
आइंस्टीन से पूर्व शिव ने ही कहा था कि 'कल्पना' ज्ञान से ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम जैसी कल्पना और विचार करते हैं, वैसे ही हो जाते हैं। शिव ने इस आधार पर ध्यान की...
 
 
 
प्राचीन वैदिक काल में आज के सभी तरह के आधुनिक अस्त्र-शस्त्र थे। इसका उल्लेख वेदों में मिलता है। उस काल की तकनीक आज के काल से भिन्न थी लेकिन अस्त्रों की...
 
 
 
 
वेदों में एक भी ऐसा मंत्र नहीं लिखा है कि जो ईश्वर के अनेक होने की घोषणा करता हो। वेदों के अनुसार ईश्वर और मानव के बीच किसी 'एजेंट' की जरूरत नहीं है। जैसे कि...