इतिहास | नीति नियम | परमात्मा | आत्मा | ब्रह्मांड | महापुरुष | आलेख
मुख पृष्ठ » धर्म-संसार » सनातन धर्म (Sanatan Dharma)
ND
SUNDAY MAGAZINE
गुरुकुल: ब्रह्मचर्य आश्रम व्यवस्था
धर्म से मोक्ष और अर्थ से काम साध्‍य माना गया है। ब्रह्मचर्य और गृहस्थ जीवन में धर्म, अर्थ और काम का महत्व है। वानप्रस्थ और संन्यास में धर्म प्रचार तथा मोक्ष का महत्व माना गया है। ब्रह्मचर्य का अर्थ होता है ब्रह्म को चरना या ब्रह्म की चर्चा व चर्चा में ही रत रहना। दूसरा अर्थ जो प्रचलित है वह है इंद्रियों का संयम रखना। विद्यार्थी और सन्यासी का यह कर्तव्य है कि वह इंद्रियों पर संयम रखकर ईश्वर परायण रहे।
ND
वेद सम्मत वाणी का प्रभाव...
ॐ। वाणी की देवी ‍वीणावादिनी माँ सरस्वती है। कहते हैं कि श्रेष्ठ विचारों से सम्पन्न ‍व्यक्ति की जुबान पर माँ सरस्वती विराजमान रहती है। बोलने से ही सत्य और असत्य होता है। अच्छे वचन बोलने से अच्छा होता है और बुरे वचन बोलने से बुरा, ऐसा हम अपने बुजुर्गों से सुनते आए हैं।
आगे पढें...
WD
WD
हिंदू उत्सव का वैज्ञानिक महत्व
जब सूर्य 'उत्तरायण' होता है तो उत्सव का माहौल होता है। 'मकर संक्रांति' एक उत्सव है और जब सूर्य की दक्षिणायन गति होती है तो व्रतों का माहौल होता है। 'श्राद्ध कर्म' व्रत और पूण्य कर्म है। श्राद्ध कर्म के पूर्व व्रतों का पालन किया जाता है। उक्त दोनों ही कर्तव्यों के अंतर्गत आते हैं। उक्त कर्तव्यों का वैज्ञानिक आधार है। उत्तरायण सूर्य शरीर, मन और वातावरण में उल्लास लाता है। दक्षिणायण सूर्य से शरीर, मन और वातावरण में विकार उत्पन्न हो सकते हैं।
• कर्तव्य है जीवन का आधार • यज्ञकर्म विज्ञान है कर्मकांड नहीं
• किसे कहते हैं सृष्टि? • नीति-नियम या व्यवस्था?
• आत्‍मा एव इदं सर्वम् • पितृयज्ञ: पितरों की तृप्ति