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जला के देख लिया
'दाग़' ने ख़ूब आशिक़ी का मज़ा,
जल के देखा, जला के देख लिया - दाग़ देहलवी
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किसी का साथ हमें रास ही नहीं
तेरा हमसफर कहाँ है
आखिर वो खफ़ा है किसलिए
अपना घर भी अपना घर नहीं लगता
इश्क़ की कौन इंतिहा लाया
तुम्हारी आँखों की तोहीन है