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किसी का साथ हमें रास ही नहीं
तुम हो कि कोई और हो इससे नहीं गरज,
अब तो किसी का साथ हमें रास ही नहीं।
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तेरा हमसफर कहाँ है
आखिर वो खफ़ा है किसलिए
अपना घर भी अपना घर नहीं लगता
इश्क़ की कौन इंतिहा लाया
तुम्हारी आँखों की तोहीन है
मोहब्बत ऐसा खेल है