शेरो-अदब
हमारी पसंद
मजमून
नई शायरी
नज़्म
आज का शेर
ग़ालिब के ख़त
मुख पृष्ठ
>
विविध
>
उर्दू साहित्य
>
आज का शेर
>
अपना घर भी अपना घर नहीं लगता
सुझाव/प्रतिक्रिया
मित्र को भेजिए
यह पेज प्रिंट करें
अपना घर भी अपना घर नहीं लगता
हर इक बस्ती में उसके साथ अपनापन सा लगता है,
नहीं है वो तो अपना घर भी अपना घर नहीं लगता।
संबंधित जानकारी खोजें
यह भी खोजें:
आज का शेर
,
अपना घर
,
Aaj ka sher
,
Apana Ghar
और भी
•
इश्क़ की कौन इंतिहा लाया
•
तुम्हारी आँखों की तोहीन है
•
मोहब्बत ऐसा खेल है
•
गिरता हुआ घर थाम लिया
•
किसको हम आवाज़ दिया करते हैं
•
इक राह तका करते हैं