1. मुझको तुझसे जो कुछ मोहब्बत है ये मोहब्बत नहीं है आफ़त है
लोग कहते हैं आशिक़ी जिसको मैं जो देखा बड़ी मुसीबत है
बन्दे एहकामे अक़्ल में रहना ये भी इक नौ की ही हिमाक़त है
एक ईमान है बिसात अपनी न इबादत न कुछ रियाज़त है
आ बुतों के फ़ुसूँ के दाम में यूँ दर्द ये भी ख़ुदा की क़ुदरत है ---------------
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