मुख्य पृष्ठ > विविध > उर्दू साहित्‍य > शेरो-अदब
सुझाव/प्रतिक्रियामित्र को भेजियेयह पेज प्रिंट करें
 
गीत : ईद
ND

रहमतें बरसेंगी-रहमत की घटा छाई है
ईदे कुरबाँ की ज़माने में बहार आई है

तू न आएगा तो तेरा ही ख़्याल आएगा
ईद का दिन तेरी यादों में गुज़र जाएगा।
दिल तमाशा है मेरा, दिल ही तमाशाई है

आज तो फूल भी कहते हैं सभी खिल-खिल के
ईद तो हम भी मनाएँगे गले मिल-मिल के
ईद जब आई है हर शै ने ग़ज़ल गाई है

अब कोई देश में अदना है न आला होगा
अब ग़रीबी को अमीरी से न शिकवा होगा
ईद फिर से यही पैगामे वफ़ा लाई है।

- अज़ीज़ अंसारी
और भी
ग़ज़ल - मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल-मीर तक़ी मीर
ग़ज़ल - ज़ोक
ग़ज़ल - ज़ोक
ग़ज़ल- मोमिन खाँ मोमिन
ग़ज़ल - मीर