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मुलाकात
09
जुलाई
2008
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पुरुष स्त्री का बस शोषण करते हैं...
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'रचनात्मकता पार्ट टाइम जॉब नहीं है
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'मैं लेखन को शब्दों की आराधना मानता हूँ'
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प्रेम अब फूल नहीं फूल के चित्र जैसा है
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अनुवाद मुझे रचनात्मक संतोष देता है
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इमरोज की खुशबू
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साहित्य के प्रति भरोसा खंडित न हो
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स्त्री पैदा नहीं होती, बना दी जाती है
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लेखन केवल कागज़ पर ही नहीं होता-तेजेन्द्र शर्मा
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नए विचारों को आने दीजिए : मालती जोशी
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मुझे सत्यजीत रे की फिल्में न्यूयॉर्क में देखने को मिलीं
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मनुष्य को मनुष्य बनाए रखना चाहते हैं तो साहित्य को सम्मान देना होगा
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कार्य जिनका सार्वजनिक जीवन पर असर पड़ता हो निजी नहीं
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जीवन के इस पड़ाव पर प्रश्न अभी शेष हैं
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जो घटित होता है मैं वही लिखती हूं
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विज्ञान ने पुराने भय मिटाए पर नए खड़े किए
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साहित्य लेखक की अकेली दुनिया नहीं
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मीडिया ने स्त्री को बिकाऊ बनाया है
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