सच्चे प्यार को प्रदर्शित करता कविता रूपी उपन्यास 'अमोरा'



इंदौर के पहले और आखिरी कॉमरेड सांसद होमी दाजी को लोग भले ही भूल गए हों, लेकिन उनकी तीसरी पीढ़ी आज भी शहर में अपनी मौजूदगी दर्ज करवा रही है। होमी दाजी के पोते फिरोज दाजी ने क्रिकेट में अपनी अलग पहचान बनाई और अब उनकी पत्नी वंदना लेखन के जरिए अंग्रेजी साहित्य जगत में अपने कदम बढ़ा चुकी हैं। पिछले साल अंग्रेजी कविता संग्रह के प्रोत्साहन का ही नतीजा है कि उन्होंने कविता रूपी अंग्रेजी उपन्यास 'अमोरा' (Amora) की रचना कर डाली। पहली बार विशिष्ट अंदाज में लिखा ये उपन्यास आज की युवा पीढ़ी को के सही मायने समझाने के साथ ही उनका पथ प्रदर्शक साबित होगा।
'वेबदुनिया' को एक खास मुलाकात में वंदना ने बताया कि मेरा परिवार मूलत: दिल्ली का रहने वाला है और बचपन से मैं आर्मी के माहौल में पली-बढ़ी हूं। पिताजी नवल किशोर शर्मा भारतीय सेना से रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल हैं और भाई कंवल किशोर भी सेना मैडल प्राप्त रिटायर कर्नल हैं। मुझे बचपन से ही साहित्य में रुचि रही। मैं 25 सालों से अंग्रेजी टीचिंग जॉब में हूं और पिछले 17 सालों से इंदौर के सत्यसाईं विद्या विहार में पढ़ाने के बाद इस वक्त स्कूल की के पद पर कार्यरत हूं।
वंदना के मुताबिक, 1997 में मेरा विवाह फिरोज दाजी से हुआ, जो खिलाड़ी के साथ ही भविष्य निधि कार्यालय में कार्यरत हैं और 97 बार स्वेच्छा से रक्तदान कर चुके हैं। परिवार ने मेरा सदैव हौसला बढ़ाया और यही कारण है कि आज मैं कविता रूपी उपन्यास 'अमोरा' को असली शक्ल प्रदान करने में कामयाब हो सकी हूं। वैसे मेरे फेवरेट राबर्ट फ्रॉस्ट और रूमी के अलावा कबीर और खलिल जिब्रान रहे हैं।

वैसे सत्यसाईं स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाते वक्त मैं उन्हें ये भी सिखाती कि कविता कैसे बनाई जाती है। स्वांत सुखाय के लिए बहुत सारी कविताएं लिखीं और पिछले साल मेरा पहला कविता संग्रह ह्यूज ऑफ लाइफ (Hues of life) का प्रकाशन हुआ। इस संग्रह के अच्छे प्रतिसार ने मुझे काफी प्रेरित किया और यही कारण है कि मैंने 'अमोरा' की रचना की। अमोरा स्पेनिश शब्द है, जिसका अर्थ होता है प्यार।

स‍च बात तो ये है कि मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी रचनाएं किताब का रूप लेंगी। इलाहाबाद के करुणेश अग्रवाल ने अमोरा का प्रकाशन किया है, जिसकी कीमत 700 रुपए है। यह एक भावनात्मक किताब है, जिसमें 20 चैप्टर हैं। हर चैप्टर के आखिरी में एक कविता है। असल में ये उपन्यास 'यूथ जनरेशन' पर केंद्रित है, जिसमें अनकंडिशनल लव, पैशंस और अपनी रिलेशनशिप के कमिटमेंट को दर्शाया गया है।

'अमोरा' में तीन लड़कियां और एक लड़के की प्यारभरी कहानी है, जिसमें उनकी भावनाओं को प्रस्तुत किया गया है। आज के युवाओं को प्यार की गंभीरता का अहसास नहीं है। उन्हें प्यार की गहराई का पता ही नहीं होता है। यही सब कुछ अहसास कराने के लिए कहानी आगे बढ़ती है। वंदना ने कहा कि हो सकता है कि आने वाले समय में मुझे अमोरा का दूसरा भाग भी लिखना पड़े।

वंदना के अनुसार, 20 चै‍प्टर्स और कविताओं का अमोरा उपन्यास भावनाओं, विचारों, अनुभूति और विश्वासों का एक 'रत्न' है। मेरी कविताएं एक-दूसरे के साथ सद्भाव में एक साथ घूमती हैं, जिससे मनुष्य की ताकत और कमजोरियों को दर्शाया जाता है। पाठकों को याद रहे कि 'कविता दिल के तारों पर चढ़ रही है और उनके साथ संगीत बना रही है'।

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