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पेंटिंग हो या कविता हर विधा में खुद को ही निखारती हूं... इरा टाक सोमवार,अक्टूबर 17, 2016

नृत्य में जीवन का हर रंग - ममता शंकर

शुक्रवार,जुलाई 29, 2016

आलोक कुमार : दुष्यंत के साए से एक मुलाकात

बुधवार,जून 17, 2015
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विदेशी पर्यटकों की हिन्दी शिक्षिका पल्लवी सिंह

शुक्रवार,जनवरी 16, 2015

तहख़ाना...जहां संवरता है लफ़्ज़ों का हुस्न

सोमवार,जून 9, 2014

देहात की दुर्दशा ने बनाया कथाकार-सत्यनारायण पटेल

शुक्रवार,फ़रवरी 28, 2014

घर की याद में चित्रकार बन गया : प्रभु जोशी

शुक्रवार,फ़रवरी 28, 2014
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विकास के परचम तले खेती हुई लापता : अनुपम मिश्र

सोमवार,सितम्बर 23, 2013

महुआ घटवारिन मेरी भी प्रिय रचना है: पंकज सुबीर

शुक्रवार,जून 28, 2013
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कवि जन्मजात नहीं होते : अशोक वाजपेयी

रविवार,मार्च 31, 2013

आध्यात्म यानी सरल जीवन और कुछ नहीं: राम भांड

शुक्रवार,दिसंबर 28, 2012

मीडिया का 'ओवर एक्टिव' होना जरूरी है : सुमित अवस्थी

बुधवार,नवंबर 21, 2012

लेखन मेरे लिए उत्सव है : वर्तिका नंदा

बुधवार,जुलाई 25, 2012
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बहुत कुछ लिखना बाकी है : जकिया जुबेरी

बुधवार,मार्च 2, 2011

आम आदमी आज एक नारा है : अज्ञेय

रविवार,फ़रवरी 20, 2011

हिन्दी बढ़ रही है: डॉ. कविता वाचक्नवी

गुरुवार,दिसंबर 16, 2010

अवचेतन से आते हैं मेरे पात्र : मालती जोशी

सोमवार,अक्टूबर 11, 2010

सोचता था अंग्रेज़ी में, लिखता था हिन्दी में..!

मंगलवार,सितम्बर 21, 2010

लेखक पात्र के पीछे चलता है : विनोद कुमार शुक्ल

गुरुवार,जून 24, 2010

नारीवादी होना मेरी मजबूरी है : सुधा अरोड़ा

बुधवार,मार्च 31, 2010
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