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पेंटिंग हो या कविता हर विधा में खुद को ही निखारती हूं... इरा टाक

सोमवार,अक्टूबर 17, 2016
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जानी-मानी फिल्म अभिनेत्री एवं कोरिओग्राफर ममता शंकर हमेशा नया करने की धुन में लगी रहती हैं। नृत्य-कला इन्हें विरासत में ...
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मुझे हमेशा लगता रहा कि एक अजीब-सा कर्ज़ है मुझ पर दुष्यंत कुमार जी का। केवल मुझ पर ही क्यों, मंच से उनके शेर पढ़कर ...
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मुंबई की पल्लवी ने तय किया कि क्यों न वह भारत आने वाले विदेशियों को सरल और रोचक ढंग से हिन्दी पढ़ाए। पल्लवी ने समझा उन ...
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बेतरतीब लकीरें रफ़्ता-रफ़्ता अक़्ल के दख़ल और उंगलियों की कसरत से अक्षरों की शक्ल इख़्तियार कर लेती हैं...बढ़ती उम्र के ...
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देहात की दुर्दशा और कठिनाइयों को बेहद नजदीक से देखा है। इसी ने मुझे कहानीकार बनने को विवश कर दिया था। सच कहूं तो ...
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ख्यात चित्रकार एवं कथाकार प्रभु जोशी के दो चित्रों को अमेरिका एवं अन्य चार राष्ट्रों द्वारा संचालित 'बेस्ट इंटरनेशनल ...
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पर्यावरण महज प्राकृतिक संसाधनों से मिलकर नहीं निर्मित होता बल्कि सुखद पर्यावरण बनता है मानव और प्रकृति के बीच परस्पर ...
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पंकज सुबीर, यह नाम हिन्दी साहित्य में भावप्रवण युवा साहित्यकार के रूप में जाना जाता है। ‍पंकज सुबीर ने वर्तमान हिन्दी ...
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अपनी विलक्षण प्रेम कविताओं के लिए अशोक वाजपेयी की एक खास पहचान है। इन दिनों वे इंदौर प्रवास पर हैं। साहित्य की ‍विभिन्न ...
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वे जिस आध्यात्म को जानते हैं उसे पाने के लिए किसी भी तरह के त्याग की सलाह भी नहीं देते। मुंबई से प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, ...
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सुमित अवस्थी, टेलीविजन की दुनिया की एक सौम्य शख्सियत। 'जी न्यूज' से आरंभ उनका सफर इन दिनों 'आजतक' पर प्रखर पत्रकारिता ...
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कविता मुझे मिलती नहीं। वह हमेशा मेरे साथ रहती है। एक सच की तरह जिसे हर रोज नहीं कहा जा सकता। वह मेरे मौन की सहयात्री ...
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जकिया जुबेरी का बचपन हिन्दुस्तान में बीता, शादी पाकिस्तान में कर दी गई और राजनीतिक करियर परवान चढ़ा ब्रिटेन में। इस तरह ...
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आज से कोई 29-30 वर्ष पूर्व वह जाड़े का कोई दिन था। अज्ञेय जी साक्षरता निकेतन, लखनऊ में आयोजित वत्सल निधि शिविर में आए ...
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हिन्दी बढ़ रही है। कम्प्यूटर पर भी यह अच्छी-खासी नजर आने लगी है। ब्लॉग तो ठीक, तकनीकी बातें भी कम्प्यूटर पर हिन्दी में ...
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महाराष्ट्रीयन संस्कारों में पली-बढ़ी लेकिन हिन्दी में सुयश पा चुकीं मालतीजी ऐसी विदूषी हैं जिनके व्यक्तित्व के पोर-पोर ...
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पिछले दिनों भारत आए तेजेन्द्र शर्मा से उनके साहित्य, हिंदी के प्रचार के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों और विदेशों में रचे ...
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अकेले हँसना मुझे पागलपन लगता है, जो देखेगा वह ऐसा ही सोचेगा लेकिन अकेले रो लेना मुझे ठीक लगता है, कि कोई देख तो नहीं ...
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सुधा अरोड़ा, कम लिखतीं हैं मगर जब लिखती हैं तब ऐसा लिखती है कि पाठक के मानस में उसकी छवि देर तक बनी रहती है और दिल की ...
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