बाल साहित्य : सबसे छोटा होना

मम्मी पापा का तो है यह, रोज रोज का रोना। कभी हुई बिस्तर में सू सू, डांट मुझे पड़ती है। बिना किसी की पूंछतांछ मां, मुझ पर शक करती है।

फनी बाल कविता : गधेरामजी

गधेरामजी थैली लेकर, पहुंचे मिठया की दुकान। बोले... तोलो गरम जलेबी, हिला-हिलाकर अपने कान। ...

बाल कविता : बड़ी चकल्लस है

रोज-रोज का खाना खाना, बड़ी चकल्लस है। दादी दाल-भात रख देती, करती फतवा जारी तुम्हें पड़ेगा ...

बाल साहित्य : जंगल की बात

जंगल के सारे पेड़ों ने, डोंडी ऐसी पिटवा दी है। छेवले की बेटी पत्तल की, कल दोनेजी से शादी ...

फनी बाल कविता : संतरे

अब तो सबके मन को भाई, महक संतरों वाली आई। केसर-केसर जैसी फांकें, छिल्के के भीतर से ...

ईश्वर ने जो हमें दिया है

चूहे ने न्योता चिड़िया को, बोला घर पर आना। आज बनाया है चुहिया ने, नई डिश वाला खाना।

शिक्षकों को समर्पित

समाज की विसंगतियों के बीच कभी-कभी विक्षुब्ध हो उठता है मन यह देखकर कि मनों बोझ उठाने पर भी घोड़ों पर कोड़े फटकारे जाते हैं

जय हनुमान - अंशुमन दुबे

जय हनुमान बजरंग बली अंजनी के लाल पवन सुत नाम तुम्हारा। जय महावीर हे महाबली रामभक्ति ही ...

बाल कविता : बुलडोजर ने धूम मचाई

चर्र-चर्र चें-चें खट-खट का, दिया नाद जब मुझे सुनाई। दौड़ पड़ा मैं यही देखने, यह आवाज कहां से आई। बाहर देखा अजब नजारा, लोगों की दी भीड़ दिखाई। मेरे ...

बाल साहित्य : टॉफी का उपहार‌

पूज्य पिताजी बचपन में, जब मुझको मार दिया करते, ले गोदी में चाचा-चाची तब, जी भर प्यार किया करते। जब किसी पड़ोसी के बच्चे को, ठोक-पीट मैं घर आता, ...

बाल कविता : जादूगर बादल‌

देखो अम्मा बादल कैसे, कैसे स्वांग रचाते। कभी-कभी घोड़ा बन जाते, हाथी बन इतराते। अरे-अरे! ...

बाल कवि अंशुमन दुबे की प्रेरक रचनाएं : भारत मेरा ...

भारत मेरा देश जहां ज्ञान का अथाह भंडार है, लोगों में सतगुणों का अंबार है। प्रकृति की कृपा ...

बाल कविता : सफलता का टिकट

बिल्ली बोली कुत्ता भैया, ट्यूशन मुझे पढ़ा दो। गणित बहुत कमजोर हमारी, पेपर आउट करा दो। ...

बाल साहित्य : मोबाइल से पानी

मोबाइल का बटन दबा तो, लगा बरसने पानी। धरती पर आकर पानी ने, क्या! उधम की ठानी। चाल बढ़ी जब ...

फनी कविता : गोरैया तू नाच दिखा

थोड़ी आज कमर मटका, गोरैया तू नाच दिखा। याद नहीं कब से ना देखा, तुझे नाचते मैंने। तेरे ...

फनी कविता : बात नहीं यह ठीक पिताजी

पापाजी यह क्या करते हो, मम्मीजी से क्यों लड़ते हो। मम्मी रोज सुबह उठ जातीं। साफ-सफाई में ...

बाल कविता : रेन कुटी

सुबह-सुबह चिड़िया चिल्लाई, इसे काटते क्यों हो भाई? पेड़ हमारे स्थायी घर, यहीं सदा मैं रहती ...

बाल कविता : थकने से बच जाते

सुपर फास्ट में हाथीजी ने, आरक्षण करवाया। बहुत भीड़ थी इस कारण से, आरएसी मिल पाया। लोअर ...

कविता : हर लहर तिरंगे की...

हर लहर तिरंगे की, बिन हवा भी लहराए, कहीं सांस शहीदों की, अभी फिजा में बाकी है......

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सामयिक

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इंटरनेट पर हिन्दी मीडिया में वेबदुनिया ने क्रांति की शुरुआत की है। इसने न सिर्फ इतिहास बनाया है ...

सपनों की उड़ंची से शब्दों की प्राण-प्रतिष्ठा

सपनों की परवाज़ को बस एक उड़ंची की दरकार होती है। पतंग की आसमान छूती बुलंदी तय करती है कि उड़ंची में ...

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