बाल कविता : चलो पढ़ाई करते हैं...

हुईं छुट्टियां खत्म, अब नाना-नानी दादा-दादी के घर से विदाई करते हैं, चलो पढ़ाई करते हैं।ही मैन, बेकमैन, स्पाइडरमैन वाला बस्ता नया खरीदते हैं। ...

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बच्चों की रोचक कविता : जादुई गलीचा

जादुई एक गलीचा उतरा आसमान से छत पर प्रसून पहुंचा निकट उसी के जो खेल रहा था छत पर ...

बाल साहित्य : गप्पी...

सुबह-सुबह से उठे रामजी, पर्वत एक उठा लाए। नदी पड़ी थी बीच सड़क पर, उसे जेब में भर लाए। फिर ...

नटखट कविता : आओ! पकड़ा पाटी खेलें

रामू आओ! श्यामू आओ! टोनी आओ! गोनी आओ! निप्पू आओ! संजू आओ! चम्पू आओ! गुड्डू आओ! मिलकर ...

बच्चों की मजेदार कविता : दर्जी और हाथी

बहुत पुरानी एक कहानी हाथी बहुत बड़ा था जब चलता था कभी सड़क पर सूंड उठा बढ़ता था ...1

चुलबुली चंचल कविता : चींटी और चिड़िया

एक कहानी बहुत पुरानी दादी कहती मुझको उसे सुनाता हूं मैं बच्चों अभी-अभी तुम सबको ...

बाल कविता : जीवन देगा कौन भला

पेड़ मिला था, पेड़ मिला। मुझे राह में पेड़ मिला। पत्ते सूखे-सूखे थे। डालों के मन रूखे थे। ...

फनी कविता : बुड्ढी के बाल

लेकर आया लल्लू लाल, लाल-लाल बुड्ढी के बाल। हरे गुलाबी पीले भी हैं श्वेत बैंगनी नीले भी ...

बच्चों की कविता : गंदी कुल्फी

मेरे घर के ठीक सामने, आया कुल्फी वाला। बोला- कुल्फी ले लो लाली, ले लो कुल्फी लाला। ...

नन्ही कविता : बागड़

बागड़ खेत किनारे लगती, औ' फसलों की रक्षा करती। खेजड़ की डाली-डाली से, खेत-खेत को घेरे रखती ...1। पशु अंदर जाने ना पाते मानव की अवरोधक बनती। ...

चुलबुली कविता : पांच फुग्गे...

पुनी‍त पांचों फुग्गे लेकर उड़ा रहा था, उनको ऊपर, ऊपर, ऊपर गैस से भरे थे वे सब पांचों ...

नन्ही कविता : हरी-भरी है प्यारी दूब

हरी-भरी है प्यारी दूब सबके मन को भाती दूब आंखों को ठंडाई देती हमें निकट बुलाती दूब ...

याद हैं वे दिन पापा ..

मुझे आज भी याद है वो दिन, जब आपकी गोद में बैठकर रंगबिरंगी फ्रॉक पहनकर मैं जाती थी,घूमने ...

बाल कविता - वर्षा आई

वर्षा आई वर्षा आई,पानी की बौछारें लाई ,ठंडे पानी में हम सबने ,धमा चौकड़ी खूब मचाई

बाल साहित्य : झांसी की रानी...

रानी थी वह झांसी की, पर भारत जननी कहलाई। स्वातंत्र्य वीर आराध्य बनी, वह भारत माता कहलाई॥ ...

बाल कविता : स्लिम बनाना है...

शेरसिंह बना रहे थे योजनाएं कईं सारी, आई छुट्टी मस्ती वाली करना है कुछ तैयारी। मच्छर ...

चुलबुली कविता : मीनू और फोन

घंटी बजती जब भी फोन की मीनू दौड़ी जाती तुरत उठाती चोंगा कर में हेलो! कर चिल्लाती ...

नन्ही कविता : कितनी अच्‍छी लगती धूप

कितनी अच्‍छी लगती धूप दुनिया को चमकाती धूप सुबह-सुबह से आती धूप सबका मन बहलाती धूप ...

मजेदार कविता : एक भैंस के ऊपर...

एक तालाब में पड़ी हुई थीं काली-काली अनेक भैंसें लगता वो सब चट्टानें हों निकली जल से ऊपर ...

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स्वामी विवेकानंद बड़े तर्क निष्ठ व्यक्ति थे। उनको कालू की पूजा का ढंग बिल्कुल नहीं जंचता, वे हमेशा ...

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जब ऑडियो कैसेट में धड़कते थे दिल...

इंटरनेट के दौर में कई पुरानी तकनीक बाज़ार से बाहर हो गई, उनके स्थान पर नई तकनीक तो आ गई लेकिन कुछ ...

हिन्दी कविता : एक सवाल?

सांस लेना, प्रार्थना करना। बोलना, खाना-पीना। उठना-बैठना, हंसना-रोना, नाचना-गाना

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