0

बाल गीत : बल्लू बोला छूमंतर

शुक्रवार,दिसंबर 1, 2017
0
1
कौआ चाचा नहीं आजकल, तुम छत पर क्यों आते? कांव-कांव चिल्ला-चिल्लाकर, हमको नहीं जगाते।
1
2
अम्मा के संग मैं भी घर का, कचरा अभी उठाऊंगी। गीला कचरा-सूखा कचरा, अलग-अलग रखवाऊंगी। डस्टबिन भी अलग-अलग हैं, सूखे-गीले ...
2
3
टीचरजी होल्ड किए, बात उन्हें करना है। लगता है मेरा ही, कोई सा उलाहना है, न मालूम थोपेंगी, काम मुझे कौन से।
3
4
बहुत देर चुप थे, जरा गुनगुनाओ, अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ। लगातार पापा ये चुप्पी बुरी है, ये हंसना-हंसाना असल जिंदगी ...
4
4
5

बालगीत : चल मेरे भाई, मेरे साथ...

शनिवार,अक्टूबर 14, 2017
चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी तुझको जो लगती है प्यारी।
5
6
मंजिल को जब है पाना, खतरों से क्यों कर डरना। बाधाओं से टकराकर, हमको है आगे बढ़ना
6
7
दीप जले हर गली-गली गुपचुप क्यों बैठे हो भाई नाचो-गाओ खुशियां बांटों दीवाली है घर आई ।
7
8

हिन्दी कविता : दिवाली आई है...

शुक्रवार,अक्टूबर 6, 2017
दीपों की कतार से, एकता और प्यार से, उर के उल्लास से, जीवन के प्रकाश से खुशियां फैलाई हैं, दिवाली आई है।
8
8
9
पूनम की चांदनी आज खिलेगी, बरसेंगे अमृत मोती। रोग-दोष छूमंतर होंगे, खिलेगी जैसे ज्योति।
9
10
हम भी भेज दिए हैं बच्चों मंगल ग्रह को यह संदेश सकल जहां से कम नहीं है अपना प्यारा भारत देश
10
11
देश की संतान है भारत मां की शान है सत्य-अहिंसा हमें सिखाता गांधी उसका नाम है
11
12
विजय हुए थे रामजी, अतुलित राक्षसी शक्ति से। तब से मनाते हैं विजयादशमी, भारतवासी भक्ति से।।1।।
12
13
जिसको पाकर मुक्त हुआ था, भारतमाता का उपवन। आओ आज सुनाएं तुमको, बापू का निर्मल जीवन।। अठ्ठारह सौ उनहत्तर में, अक्टूबर ...
13
14
भारतमाता, अंधियारे की, काली चादर में लिपटी थी। थी, पराधीनता की बेड़ी, उनके पैरों से, चिपटी थी। था हृदय दग्ध, धू-धू ...
14
15
जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई। विश्वासी, धर्मनिष्ठ, कर्मठ, ...
15
16
दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत। गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥ सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल। बिना रुके ...
16
17
मेरा छोटा सा परिवार , इससे हम करते हैं प्यार। मम्मी-पापा सोनू -भैया, करते मुझसे प्यार दुलार ।।1।।
17
18
अजब सलोना, सबसे प्यारा, गांव हमारा भाई। मस्त मगन हो पक्षी नभ में, उड़ रहे हैं भाई।। हरी घास है मखमल जैसी, चहुं दिशा में ...
18
19

हिन्दी कविता : सूरज भैया

गुरुवार,सितम्बर 21, 2017
नित्य सवेरे उठकर कहती, राजू को उसकी मैया। पूरब में देखो तो राजू, आए हैं सूरज भैया ।
19