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बाल गीत : कौआ चाचा

मंगलवार,नवंबर 7, 2017
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अम्मा के संग मैं भी घर का, कचरा अभी उठाऊंगी। गीला कचरा-सूखा कचरा, अलग-अलग रखवाऊंगी। डस्टबिन भी अलग-अलग हैं, सूखे-गीले ...
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टीचरजी होल्ड किए, बात उन्हें करना है। लगता है मेरा ही, कोई सा उलाहना है, न मालूम थोपेंगी, काम मुझे कौन से।
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बहुत देर चुप थे, जरा गुनगुनाओ, अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ। लगातार पापा ये चुप्पी बुरी है, ये हंसना-हंसाना असल जिंदगी ...
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बालगीत : चल मेरे भाई, मेरे साथ...

शनिवार,अक्टूबर 14, 2017
चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी तुझको जो लगती है प्यारी।
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मंजिल को जब है पाना, खतरों से क्यों कर डरना। बाधाओं से टकराकर, हमको है आगे बढ़ना
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दीप जले हर गली-गली गुपचुप क्यों बैठे हो भाई नाचो-गाओ खुशियां बांटों दीवाली है घर आई ।
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हिन्दी कविता : दिवाली आई है...

शुक्रवार,अक्टूबर 6, 2017
दीपों की कतार से, एकता और प्यार से, उर के उल्लास से, जीवन के प्रकाश से खुशियां फैलाई हैं, दिवाली आई है।
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पूनम की चांदनी आज खिलेगी, बरसेंगे अमृत मोती। रोग-दोष छूमंतर होंगे, खिलेगी जैसे ज्योति।
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हम भी भेज दिए हैं बच्चों मंगल ग्रह को यह संदेश सकल जहां से कम नहीं है अपना प्यारा भारत देश
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देश की संतान है भारत मां की शान है सत्य-अहिंसा हमें सिखाता गांधी उसका नाम है
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विजय हुए थे रामजी, अतुलित राक्षसी शक्ति से। तब से मनाते हैं विजयादशमी, भारतवासी भक्ति से।।1।।
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जिसको पाकर मुक्त हुआ था, भारतमाता का उपवन। आओ आज सुनाएं तुमको, बापू का निर्मल जीवन।। अठ्ठारह सौ उनहत्तर में, अक्टूबर ...
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भारतमाता, अंधियारे की, काली चादर में लिपटी थी। थी, पराधीनता की बेड़ी, उनके पैरों से, चिपटी थी। था हृदय दग्ध, धू-धू ...
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जीवन के सूखे मरुथल में, झेले ये झंझावात कई। जितनी बाधा, कंटक आते, उनसे वे पाते, शक्ति नई। विश्वासी, धर्मनिष्ठ, कर्मठ, ...
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दशहरा का तात्पर्य, सदा सत्य की जीत। गढ़ टूटेगा झूठ का, करें सत्य से प्रीत॥ सच्चाई की राह पर, लाख बिछे हों शूल। बिना रुके ...
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मेरा छोटा सा परिवार , इससे हम करते हैं प्यार। मम्मी-पापा सोनू -भैया, करते मुझसे प्यार दुलार ।।1।।
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अजब सलोना, सबसे प्यारा, गांव हमारा भाई। मस्त मगन हो पक्षी नभ में, उड़ रहे हैं भाई।। हरी घास है मखमल जैसी, चहुं दिशा में ...
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हिन्दी कविता : सूरज भैया

गुरुवार,सितम्बर 21, 2017
नित्य सवेरे उठकर कहती, राजू को उसकी मैया। पूरब में देखो तो राजू, आए हैं सूरज भैया ।
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कविता : देखो तो शाला जाकर

बुधवार,सितम्बर 20, 2017
करके जल्दी से तैयारी, शाला पढ़ने जाएंगे। चित्र बने हैं जहां मनोहर, मन अपना बहलाएंगे।
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