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बाल गीत : बनकर फूल हमें खिलना है...

शुक्रवार,मई 18, 2018
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नानाजी के गांव है जाना, गांव खेत की सैर करेंगे। शुद्ध हवा सांसों में भरकर, छुप्पा-छुप्पी के खेल करेंगे।
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मां अहिल्या देवी हैं अवतार हैं। हर तरफ उनकी ही जय-जयकार है, लोग मंगल गीत उनके गा रहे उन्हीं के दीप जलाए जा रहे
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गुड़ की लैया नहीं मिली है, बहुत दिनों से खाने को। बचपन फिर बेताब हो रहा, जैसे वापस आने को।
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पी लो, पी लो, पी लो। ठंडा पानी पी लो।। सूरज तपता भोर से, गरमी लगती जोर।
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तोतापरी, दशहरी, लंगड़ा, हापुस, नीलम, लालमुंहां। केशर, देशी, खट्टा, चौसा, कलमी क्या बादाम यहां।। एक टोकरी में आ बैठे ...
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खोली है मस्ती ने खुशियों की मुट्ठियां फिर आईं छुट्टियां। बस्तों को चैन मिला, हमको आराम
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बहो कि जैसे बहती धारा। मगर न टूटे कभी किनारा।। बढ़ते जाओ, कहता पानी। दुनिया सारी आनी-जानी।।
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सोचो ज़रा अगर हम पेड़ होते जग को ठंडी छांह देते फल,पत्ते,लकड़ी भी कितने उपयोगी होते....!! नन्ही चिरैय्या अगर ...
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तेईस मार्च को तीन वीर, भारतमाता की गोद चढ़े। स्वतंत्रता की बलवेदी पर,
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चले बचाने धरती को हम, हम बच्चे हिन्दुस्तान के। बच्चे हम संसार के।। कल-कल बहती नदियां हों, जल में पलता जीवन हो।
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मैं नतमस्तक हो बाबा, श्रद्धा के फूल चढ़ाऊं, जय भीमा, जय भीमा, तेरे चरणों की धूल कहाऊं!! अर्थशास्त्री, कानून के ज्ञाता, ...
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भीमराव अंबेडकर बाबा, शत-शत तुम्हें प्रणाम, भारत की पावन गाथा, में अमर तुम्हारा नाम।
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बाल कविता : आया हिन्दू नववर्ष

शुक्रवार,मार्च 16, 2018
अवनी से अंबर तक छाया नववर्ष। सिन्दूरी भोर लिए आया नववर्ष।। तैरते हवाओं में पंछी रंगीन।
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ओ मेरी निंदिया रानी, चुपके से तू आ जा री। मीठे सपनों में खो जाऊं,
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बढ़िया सा एक उड़नखटोला,काश! कहीं से पाते जी।अपने भैया अजय-विजय संग,
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बाल कविता : चिड़िया

गुरुवार,फ़रवरी 22, 2018
चिड़िया फुर्र-फुर्र उड़ती है, हाथ लगाओ डरती है। चीं-चीं करती जाती है,
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नभ में देखो प्यारे-प्यारे, चम-चम चमक रहे हैं तारे।अठखेलियां करते हैं हरदम,
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कविता : चाय गरम, चाय गरम...

सोमवार,फ़रवरी 19, 2018
चाय गरम, चाय गरम, जिसका नहीं कोई धरम। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई...
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काम हाथ से करने वाले, मोबाइल में ज्ञान इस तरह, का कुछ पापा भर दो।
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