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बाल कविता : पों-पों हॉर्न बजाती बस...

प्रतिदिन आती-जाती बस, विद्यालय पहुंचाती बस। घर से जाओ जल्दी से पों-पों हॉर्न बजाती बस। तीखी धूप, धुआं, कीचड़, सबसे हमें बचाती बस।

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गणतंत्र दिवस पर कविता : देश की माटी...

मैं भारतमाता का पुत्र प्रतापी, सीमा की रक्षा करता हूं। जो आके टकराता है, अहं चूर भी करता ...

कविता : देश का इंसान

देश टिका है अपने जन पर। जन टिका है अपने मन पर।। देश को तभी बढ़ा पाएंगे। जब खुद को आगे ले ...

गणतंत्र दिवस विशेष : 'जन गण मन'

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित गीत 'जन गण मन..' को संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को ...

कविता : गणतंत्र है महान...

पावन है गणतंत्र यह, करो खूब गुणगान। भाषण-बरसाकर बनो, वक्ता चतुर सुजान॥ वक्ता चतुर सुजान, ...

एक निवेदन गणतंत्र दिवस पर

अंधेरा धरा पर छाया हुआ है, निशा कब कटेगी नहीं कुछ पता है। सूर्य अपनी डगर पर यूं ही खड़ा ...

बाल गीत : गुड़ियाजी सरपंच बनेंगी

गुड़ियाजी सरपंच बनेंगी, गुड्डा राजा उपसरपंच। आपस में मिल-बैठ करेंगे, सारे अच्छे काम। ध्यान ...

बाल कविता : गरीबी का आलम

कड़ाके की ठंड है, गरीबी का आलम। लड़का किनारे, कूड़ा बीन रहा है। रसोई में आटा, नहीं है उसके। ...

बाल कविता : बुजुर्गों की बातें

भेज रहे हैं नेह निमंत्रण, चिड़ियों तुम्हें बुलाने को। दाने बिखराए आंगन में, भूल न जाना आने ...

हिन्दी कविता : शुभ-कामनाएं 2016

कामना है, सब सुखी हों, इस नवागत वर्ष में। हर जन हो भागीदार, अब देश के उत्कर्ष में।। ...

कविता : बीत जाएगा यह भी साल

आते ही संकेत दे दिया, आने वाला है मधुमास वादो और विवादों संग, बीत जाएगा यह भी साल कुछ ...

हिन्दी कविता : नूतन वर्ष

नूतन वर्ष अंबर से खुशियां बरसाएगा, आनंद का उपहार हाथों से लुटाएगा, बुरे कर्म को भूल ...

नववर्ष कविता : जीवन में प्रकाश हो

यार तुम्हारी झोली में, खुशियों की बरसात हो, प्रेम पूर्वक दिन बीते और सुहानी रात हो, नए ...

नववर्ष कविता : गढ़ो नई कहानी

नए वर्ष में गढ़ो कुछ नई कहानी , फूल बनके गम की छोड़ दो निशानी , ऐसी मिसाल दो कि नाम हो जाए, ...

नववर्ष कविता: बहुत बंधी है आशा

नई उमंगें नई लालसा, नई-नई अभिलाषा, आने वाले साल से, बहुत बंधी है आशा, खुशियों के मोती ...

कविता : वक्त ने हमें सिखाया है

नव साल मुबारक जन-जन को, खुशियों का तोहफा लाया है , हंसी के मोती बिखरा करेंगे, वक्त ने हमें सिखाया है...भ्रष्टाचार कम हो जाएगा, अत्याचारी गुम हो ...

नए साल पर कविता : नववर्ष मुबारक हो सबको...

नववर्ष मुबारक हो सबको, सबके घर खुशियां आ जाए। मेरे हाथों से रचित ये रचना, सबके मन को भा ...

नववर्ष पर कविता : कैलेंडर...

दीवारों पर लगेंगे नए कैलेंडर, पुराने हटाए जाएंगे। नए साल में नए जोश संग, उत्सव लोग ...

नववर्ष आगमन पर कविता : स्वागत को तैयार रहो...

स्वागत को तैयार रहो तुम, मैं जल्द ही आने वाला हूं। बारह महीने साथ रहूंगा, खुशियां भी लाने ...

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कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं ज़मीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता, बुझा सका है भला कौन वक्त ...

हिन्दी कविता : समाजवाद

मैं समाजवाद हूं, पूंजीवाद की छाया के तले। आज मैं आबाद हूं, देखता नित दिन मैं। श्रमिक को पिसता हुआ, ...

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