हिन्दी कविता : सूरज भैया

गुरुवार,सितम्बर 21, 2017

कविता : देखो तो शाला जाकर

बुधवार,सितम्बर 20, 2017
करके जल्दी से तैयारी, शाला पढ़ने जाएंगे। चित्र बने हैं जहां मनोहर, मन अपना बहलाएंगे।

बाल कविता : नई पहचान

मंगलवार,सितम्बर 19, 2017
नित्य सवेरे तुम जग जाना, धरती मां को शीश नवाना । प्यारे बच्चों इस दुनिया में, मिल-जुलकर पहचान बनाना।
अश्व की शक्ति, अपरिमित तेज, अदम्य वेग। रण का वीर, चेतक रणधीर,
होमवर्क करना पड़ता है, किस बात की होती छुट्टी। जब देखो तब मम्मी मेरी, पिलाती डांट की घुट्टी। घूमने कहीं जाने न देती, घर ...
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बरखा रानी के आते ही, छाई कुल हरियाली। हरे-भरे हैं बाग-बगीचे, धरणी लागे अति प्यारी। भ्रमर नृत्य कलियों पर करता, ...
मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े हूं वह भाषा, जिसमें तुमने यौवन, प्रीत के पाठ पढ़े .... पढ़ें हिन्दी ...
एक ब्लैड में चालीस दाढ़ी, का विज्ञापन आया। खुशियों के मारे चूहे ने, कत्थक नाच दिखाया। बोला, पैसे खूब बचेंगे, खुश हो ...
मां मस्तक का चंदन, मां फूलों की है बगिया। मां धरा-सी विस्तारित, मां ही मेरी दुनिया।
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आलू-गोभी आलू-गोभी, आलू-गोभी। आलू-गोभी की सब्जी में, डालो लाल टमाटर। फिर रोटी के संग में खाओ,
लगी हुई थी हम बच्चों को, बहुत दिनों से आस। दादा-दादी की शादी के, होंगे साल पचास। स्वर्ण जयंती जल्दी होगी, हम सोचें ...
मिले हाथ से हाथ तो मिलकर, दृढ़ ताकत बन जाते। बड़े-बड़े दुश्मन तक इसके, आगे ठहर न पाते। ईंट से ईंट जुड़ी तो कई, मंजिल का घर ...
आज जन्मदिन है दादी का, धूम मची है सारे घर में, बच्चों के गाने इक स्वर में। रम्मी तबला बजा रही है, पम्मी घर को सजा रही ...
कैसे हो गजानन अबकी साल, भारत में तो मचा है धमाल। जीएसटी से व्यापारी हैं बेहाल, दलालों की नहीं गल रही है दाल, जमाखोरों ...
घोर त्वं अघोर त्वं भाव त्वं विभोर त्वं सिद्धि त्वं प्रसिद्धि त्वं क्षरण त्वं वृद्धि त्वं अखंड बुद्धि-शुद्धि त्वं प्रचंड ...

प्रार्थना : वर दो गणेशजी...

मंगलवार,अगस्त 22, 2017
वर दो, वर दो, वर दो गणेशजी। हर लो हमारे, प्रभु सारे दु:ख क्लेशजी। धर्म के नाम पर, जंग छिड़ी हैं यहां। हिन्द बंट जाए, ...

रविवार पर फनी कविता...

शनिवार,अगस्त 19, 2017
कितना जल्दी भागा आता, बच्चों का त्योहार। सूरज बाबा ने दिया है... हमको यह उपहार। ना तो सुबह, सुबह ही उठना ना ही बस्ता ...
सुनाता एक किस्सा सुनो मेरे नगर में, तालाब में था रहता मेंढक एक प्यारा। दोस्ती उसकी हो गई इक बगुले से वहीं, बगुला नित ...
आपसी कलह के कारण से। वर्षों पहले परतंत्र हुआ।। पन्द्रह अगस्त सन् सैंतालीस। को अपना देश स्वतंत्र हुआ।। उन वीरों को हम ...
चलती ब्रज दर्शन की रेल राधारानी नाम है इसका चलती रेलमपेल। यह गोकुल है, लीला जिसमें करते थे नंदलाला