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बालगीत : चल मेरे बेटे, तू चल...

शुक्रवार,जनवरी 19, 2018
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दादा-दादी आज सुबह से, बैठे बहुत रिसाने हैं। नहीं किया है चाय-नाश्ता, न ही बिस्तर छोड़ा है।
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जब उड़ेंगी रंग भरेंगी तितलियां, हवाओं में आकर्षण रहेंगी तितलियां। ढूंढते हो कहां यहां-वहां, संग फूलों के मिलेंगी ...
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भिंडी समझे एक मिर्च को, खा गए पूरी-पूरी। जीभ जली तो चिल्लाने की, ही थी अब मजबूरी।
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आकाश में उड़तीं, रंग-बिरंगी पतंगें, करती न कभी, किसी से भेदभाव।
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शीतलहर के उग गए पर, सरक-सरककर, सर-सर-सर, शीतलहर के उग गए पर।
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कचरा फेंका बीच सड़क पर, बड़े बेशरम, टोकनियों में लाए भर-भर, बड़े बेशरम... दफ्तर की सीढ़ी पर थूका, पान चबाकर,
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मेरी दादी,की आंखों में,डिबरी का सूरमा था,जो डिबिया की लौ...
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दो घंटे से इस मच्छर ने, किया नाक में दम। मैंने जरा डांटकर बोला, जा फहीम को काट।
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नववर्ष कविता : लो बीत गया एक साल, आया नया साल। लेके सपने हजार, आया नया साल।
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कितना तेज दौड़ता-फिरता, यह दीपू का घोड़ा है, उड़ता जाता गिरता-पड़ता, यह दीपू का घोड़ा है। आटा लाता सब्जी लाता, दूध दही घी ...
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चल-चलकर चींटी ना थकती, करती अनुशासन की भक्ति। खुद से ज्यादा बोझ उठाकर, आसमान को लक्ष्य बनाकर।
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मुट्ठी खोली हाथ घुमाकर, बल्लू बोला छूमंतर। जय माता कंकाली बोला, जय कलकत्ते वाली बोला। चुन्नू, मुन्नू, डॉली बोला, ...
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कौआ चाचा नहीं आजकल, तुम छत पर क्यों आते? कांव-कांव चिल्ला-चिल्लाकर, हमको नहीं जगाते।
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अम्मा के संग मैं भी घर का, कचरा अभी उठाऊंगी। गीला कचरा-सूखा कचरा, अलग-अलग रखवाऊंगी। डस्टबिन भी अलग-अलग हैं, सूखे-गीले ...
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टीचरजी होल्ड किए, बात उन्हें करना है। लगता है मेरा ही, कोई सा उलाहना है, न मालूम थोपेंगी, काम मुझे कौन से।
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बहुत देर चुप थे, जरा गुनगुनाओ, अरे भाई थोड़ा हंसो-मुस्कुराओ। लगातार पापा ये चुप्पी बुरी है, ये हंसना-हंसाना असल जिंदगी ...
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बालगीत : चल मेरे भाई, मेरे साथ...

शनिवार,अक्टूबर 14, 2017
चल मेरे भाई, मेरे साथ, तुझको खिलाऊं दाल और भात। मिला के उसमें चटनी न्यारी तुझको जो लगती है प्यारी।
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मंजिल को जब है पाना, खतरों से क्यों कर डरना। बाधाओं से टकराकर, हमको है आगे बढ़ना
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दीप जले हर गली-गली गुपचुप क्यों बैठे हो भाई नाचो-गाओ खुशियां बांटों दीवाली है घर आई ।
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