बाल कविता : चंदा मामा

चंदा मामा चंदा मामा। कब हलुवा पूड़ी खिलाओगे। अपने भांजे से मिलने हेतु। कब छत पर आओगे।

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बाल साहित्य : गांधी की, मोदी की शिक्षा

बीच सड़क पर मुन्ना-मुन्नी ने कचरा फैलाया। तुरत पड़ोसी दादाजी ने बीना और हटाया। बोले बच्चो ...

बाल साहित्य : तर्क से नई खोजें

कभी बनो मत रट्टू तोता। समझो दुनिया में जो होता।। क्यों होते हैं दिन और रात। क्यों ठंडी, ...

बाल कविता : चंदा-तारे

चंदा ना उतरे धरती पर, तारे भी ना हाथ मिलाते। क्यों ना अम्मा सप्त ऋषि अब, हम बच्चों से हैं ...

बाल कविता : गौरेया के हक में

गांव के चौपाल में चहकती गौरेया, मीठे-मीठे गीत सुनाती गौरेया गुड़िया को धीरे से रिझाती ...

बाल दिवस पर कविता : एक जवाहरलाल

राष्ट्रवाटिका के पुष्पों में, एक जवाहरलाल। जन्म लिया जिस दिन लाल ने, दिवस कहाया बाल॥

बाल साहित्य : दादी मां मेरी प्यारी-प्यारी

दादी मां मेरी प्यारी-प्यारी मुझको कहती राजकुमारी, अच्छी-अच्छी बातें कहती मैं रूठूं तो ...

बाल साहित्य : बंदर मामा, पहन पजामा

बंदर मामा, पहन पजामा निकले थे बाजार, जेब में उनके कुछ थे पैसे करना था व्यापार। एक दुकान ...

बाल कविता : इनको करो नमस्तेजी

आज गांव से आए काका, इनको करो नमस्तेजी। जब-जब भी वे मिलने आते, खुशियों की सौगातें लाते। ...

बाल कविता : शेरसिंह की तैयारी

शेरसिंह बना रहे थे योजनाएं कईं सारी, आई छुट्टी मस्ती वाली करना है कुछ तैयारी। मच्छर ...

हिन्दी बाल कविता : मुनिया का नाटक

बन-ठन पानी लेने को चली है रानी मुनिया, मुनिया का नाटक देखे दुनिया। मुनिया और झुनिया नाटक ...

बाल कविता : मनोबल

अपने मनोबल को इतना सशक्त कर, कठिनाई भी आने से जाए डर। आत्मविश्वास रहे तेरा हमसफर, ...

कविता : नेहरू चाचा तुम्हें सलाम

नेहरू चाचा तुम्हें सलाम। अमन-शांति का दे पैगाम॥ जग को जंग से बचाया। हम बच्चों को भी ...

नन्ही कविता : क्या-क्या खाकर आए

स्कूल खुली तो टीचर ने, पूछा क्या-क्या खाकर आए, तड़-तड़ लगे बताने जो सब घर से खा-खाकर आए। ...

बाल साहित्य : सुंदर गिलहरी आई

सुंदर गिलहरी आई, अनुशासन की सीख लाई, दाने खा इठलाती आई नन्हे हाथ हिलाती आई, थकती नहीं ...

बाल कविता : एक जरा-सा बच्चा

एक जरा-सा बच्चा घर का, सब माहौल बदल देता है। बच्चे का कमरे में होना, है खुशियों का एक ...

बाल कविता : पिता

जब-जब डिगे पैर तुम्हारे, हाथ पकड़कर दिया सहारा। पहुंचाने को तुम्हें किनारे, त्याग दिया ...

बाल साहित्य : दाल-बाटियों के दिन

फूल हंसे पत्ते मुस्काए, दाल-बाटियों के दिन आए। आंगन बीचोबीच अभी मां ने कंडे सुलगाए। ...

मनोरंजक कविता : बिल्ले से बोली बिल्ली

बिल्ले से बोली बिल्ली, अगर ना मिली दिल्ली। अगर ना मिली दिल्ली मैं कुछ ऐसा कर जाऊंगी

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लाइफ स्‍टाइल

लिपट जाता हूं मां से...मुनव्वर राना

लिपट जाता हूं मां से और मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूं, हिन्दी मुस्कुराती है

बाल कविता : चंदा मामा

चंदा मामा चंदा मामा। कब हलुवा पूड़ी खिलाओगे। अपने भांजे से मिलने हेतु। कब छत पर आओगे।

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जरुर पढ़ें

अगर आपकी समस्या है-पार्टी में क्या पहनूं... तो इसे पढ़ें

पार्टी युवाओं के लिए मौज-मस्ती का बहाना होती है। यह एक ऐसा मौका होता है, जिसमें आप अपने परिधानों से ...

प्रवासी साहित्य : दादी नहीं सुनाती दिवाली की कहानी

दादी नहीं सुनाती, दिवाली की कहानी, क्योंकि नहीं देखने को मिलती चारों भाइयों की जोड़ी। किसी भी घर ...

डोर रिश्तों की : कुछ हम सुधरें, कुछ तुम

किसी के अहं पर सीधा प्रहार करना, बातों-बातों में नीचा दिखाना या प्रत्येक कार्य में त्रुटियां ...

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