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क्रिकेट का बुखार होगा शबाब पर, टीम इंडिया की नजर 7वें एशिया कप खिताब पर

Last Updated: गुरुवार, 13 सितम्बर 2018 (18:49 IST)
नई दिल्ली। भारत का इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में बेशक निराशाजनक प्रदर्शन रहा था लेकिन टीम इंडिया शनिवार से में शुरू होने वाले में 7वीं बार खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी।

विराट कोहली को विश्राम : भारतीय टीम ने उसके नियमित कप्तान विराट कोहली को एशिया कप से विश्राम दिया है जबकि ओपनर रोहित शर्मा इस टूर्नामेंट में टीम की कप्तानी संभालेंगे। भारतीय टीम टेस्ट मैच में बेशक इंग्लैंड में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी हो लेकिन सीमित ओवरों में उसका प्रदर्शन शानदार रहा है। एशिया कप में भारत का दबदबा रहा है और अब तक 6 बार उसने यह खिताब जीता है।
भारत का अच्छा रिकॉर्ड : भारत ने एशिया कप को 5 बार एकदिवसीय फार्मेट और एक बार ट्वंटी-20 प्रारूप में जीता है। श्रीलंका ने 5 बार और पाकिस्तान ने 2 बार एशिया कप जीता है। पहली बार एशिया कप का आयोजन 1984 में शारजाह में हुआ था और इस बार का टूर्नामेंट संयुक्त अरब अमीरात के दुबई और अबू धाबी में खेला जाएगा। एशिया कप का फाइनल 28 सितंबर को होगा।

छह टीमों के 2 ग्रुप : टूर्नामेंट से पहले क्वालीफाइंग टूर्नामेंट खेला गया था जिसमें हांगकांग विजेता रहा था और उसने मुख्य टूर्नामेंट में जगह बनाई थी। एशिया कप में 6 टीमों को 2 ग्रुपों में बांटा गया है। ग्रुप 'ए' में भारत और उसका चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान तथा क्वालीफायर हांगकांग है जबकि ग्रुप 'बी' में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका हैं। हर ग्रुप में शीर्ष 2-2 टीमें सुपर फोर में पहुंचेंगी जिसके बाद 2 टॉप टीमों के बीच फाइनल होगा।
भारत को पाकिस्तान से कड़ी चुनौती : पिछला एशिया कप 2016 में ट्वंटी-20 प्रारूप में खेला गया था और भारत ने मेजबान बांग्लादेश को ढाका में खेले गए फाइनल में हराकर खिताब जीता था। भारत इस बार भी खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है और अब यह टूर्नामेंट 50 ओवरों के प्रारूप में होगा।
भारत को सरफराज अहमद की कप्तानी वाली पाकिस्तानी टीम से कड़ी चुनौती मिलेगी। पाकिस्तान ने पिछले वर्ष आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में भारत को हराकर खिताब जीता था और उस जीत के बाद से पाकिस्तान ने लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है।
भारत के पास खिताब जीतने की क्षमता : भारतीय टीम अपनी 'रन मशीन' और कप्तान विराट कोहली की गैरमौजूदगी में उतरेगी। इसके बावजूद भारत के पास सीमित ओवर प्रारूप में ऐसे धुरंधर खिलाड़ी हैं, जो खिताब जीतने की क्षमता रखते हैं। टीम में पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह का होना टीम के लिए किसी रामबाण से कम नहीं है। विकेट के पीछे खड़े धोनी किसी भी कप्तान के लिए सबसे बड़े सहायक साबित होते हैं।
पूर्व कप्तान धोनी पर सबकी नजरें : गेंदबाजों को सही जगह गेंद डालने की सलाह से लेकर सही डीआरएस फैसला लेने तक और मध्यक्रम में बल्लेबाजी में टीम को संभालने तक धोनी का कोई जवाब नहीं है। एकदिवसीय क्रिकेट में 10,000 रन पूरे कर चुके 37 वर्षीय धोनी की नजरें खुद भी इस टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन कर अगले साल के विश्व कप के लिए अपनी जगह पक्की करने पर लगी होंगी।

रोहित भविष्य के टेस्ट कप्तान के भी दावेदार : कप्तान रोहित इंग्लैंड में सीमित ओवर के मैच खेलने के बाद स्वदेश लौट आए थे और अब एशिया कप में वे टीम की कप्तानी संभालेंगे। रोहित साबित करना चाहेंगे कि वे इस समय टीम के सबसे बेहतरीन ओपनर हैं और भविष्य में उन्हें टेस्ट टीम के लिए भी दावेदार रखा जाना चाहिए।
शिखर धवन के पास मौका : बल्लेबाजी में शिखर धवन इंग्लैंड की निराशा को पीछे छोड़ना चाहेंगे। टेस्ट सीरीज में शिखर का प्रदर्शन काफी निराश करने वाला रहा था लेकिन वे अपने पसंदीदा फार्मेट में लौटने जा रहे हैं। केदार जाधव, दिनेश कार्तिक, मनीष पांडे, लोकेश राहुल, अंबाटी रायुडु और ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या पर बल्लेबाजी का दारोमदार रहेगा। तेज गेंदबाजी का जिम्मा जसप्रीत बुमराह, भुवनेश्वर कुमार, पांड्या और शार्दुल ठाकुर संभालेंगे जबकि कलाई के स्पिनरों कुलदीप यादव और युजवेंद्र चहल की जोड़ी विपक्षी बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा लेगी।
अगले साल इंग्लैंड में विश्व कप : चैंपियंस ट्रॉफी का फाइनल हारने के बाद एशिया कप भारतीय टीम प्रबंधन के लिए अपने संयोजन को आंकने का एक बेहतरीन मौका है। टीम को देखना है कि किस क्रम के लिए कौन से बल्लेबाज फिट हैं और गेंदबाजी संयोजन कैसा रखा जाना है? अगले वर्ष 2019 में इंग्लैंड में होने वाले विश्व कप के लिए एशिया कप एशियाई टीमों के सामने एक बड़ी चुनौती और खुद को आंकने का शानदार मौका है।

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