हिन्दी कविता : बदला मौसम

 chidiya

चिड़िया
अब नहीं लाती दाना
घोंसले में छिपे
बच्चों के लिए
जो, अब लगने लगे हैं
उसे पराए से।
वह सोचती है कि
बच्चे भी सोचते हैं
ऐसा ही कुछ
शायद इसीलिए
वे अब खुद चुगते हैं दाना
कुछ भी नहीं कहते उससे।

और चिड़िया
कोशिश नहीं करती
दाना उठाने की
जो बच्चों की चोंच से
गिर जाता है बार-बार
घोंसले में...
क्योंकि परायों के लिए
कोई कुछ नहीं करता।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :