रचें नया कोई इतिहास सुनहरा...

सोमवार,सितम्बर 25, 2017
रंग लाई है दोस्ती (दो विश्वशक्तियों) भारत की और जापान की। साकार होने लगीं कल्पनाएं, हमारे अरमानों की, उड़ान की।। ...
दु:ख की परिभाषा भूखे से पूछो या जिनके पास पैसा नहीं हो उससे पूछो, अस्पताल में बीमार के परिजन से पूछो, बच्चों की फीस ...
मन अंदर है गहन अंधेरा, चारों ओर दुखों का घेरा। जीवन की पथरीली राहें, तेरे चरण हैं मृदुल सवेरा। हे शैलपुत्री त्वं चरणं ...

कविता : नारी तेरे रूप अनेक

गुरुवार,सितम्बर 21, 2017
मैंने पूछा लोगों से नारी क्या है ? किसी ने कहा मां है, किसी ने कहा बहन किसी ने कहा हम सफर है, तो किसी ने कहा दोस्त
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हिन्दी कविता : बचपन बचा लो मां

मंगलवार,सितम्बर 19, 2017
दीदी को जो वक्त देती हो वो वक्त मुझे भी दो न मां जो हिदायत उन्हें देती हो वो मुझे भी दो न मां
भारत का आध्यात्मिक जीवन संवरा वेद, उपनिषद, पुराणों से। हिमालयी तपस्या-स्थलों से, पवित्रम तीरथ स्थानों से।। वाल्मीकि, ...
ओवल में मन को खटवा गयो, भारत अपनो कप लुटवा गयो। पाकिस्तान गुलेन्दो खा रयो, भारत जीती बाजी हरवा गयो।
लो देखते ही देखते गुजर गए उम्र के तीनों पड़ाव ।
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पीड़ाओं से सदा घिरे जो, उनका अंतर्नाद तुम कैसे कह दोगे इसको पल भर का उन्माद
हिन्दी का जो मान हुआ है हर मुख से जब गान हुआ है

कविता : बात जो मुंह से निकली

शुक्रवार,सितम्बर 15, 2017
सूखे पत्तों पर पड़ी चिंगारी, भभक जाएगी बात जो मुंह से निकली, दूर तक जाएगी

हिन्दी दिवस : पहचान है हिन्दी

गुरुवार,सितम्बर 14, 2017
भारत मां के माथे की बिंदी है हिन्दी। इस देश की गौरव गाथा है हिन्दी।। इसे हमें इसका सम्मान दिलाना होगा। हिन्दुस्तान के ...
मैं वह भाषा हूं, जिसमें तुमने बचपन खेला और बढ़े हूं वह भाषा, जिसमें तुमने यौवन, प्रीत के पाठ पढ़े .... पढ़ें हिन्दी ...
राष्ट्रभाषा की व्यथा। दु:खभरी इसकी गाथा।। क्षेत्रीयता से ग्रस्त है। राजनीति से त्रस्त है।। हिन्दी का होता अपमान। घटता ...
हम सबकी प्यारी, लगती सबसे न्यारी। कश्मीर से कन्याकुमारी, राष्ट्रभाषा हमारी।
भाषा जब सहज बहती, संस्कृति, प्रकृति संग चलती। भाषा-सभ्यता की संपदा, सरल रहती अभिव्यक्ति सर्वदा।
मां मस्तक का चंदन, मां फूलों की है बगिया। मां धरा-सी विस्तारित, मां ही मेरी दुनिया।
शिक्षा का सम्मान बिकाऊ है भाई, पैरों पर गिरना टिकाऊ है भाई। तुम मेरे हो तो आ जाओ मिल जाएगा, मैं अध्यक्ष हूं मैडल तुम पर ...
मैं कैसे सुन लूं तुम्हारे मन की बात रोती मां का क्रंदन अब डराता है जो सपने हो गए आंखों में पत्थर उनको देखकर ये मन बहुत ...