0

लोकसभा चुनाव 2019 पर कविता : चुनाव महा-उत्सव

मंगलवार,अप्रैल 23, 2019
Election
0
1
परियोजनाओं के नाम पर, किया जा रहा पृथ्वी को परेशान। कोई मेधा, कोई अरुंधति बन, दे दो उसे जीवनदान।
1
2
सोचो ज़रा अगर हम पेड़ होते जग को ठंडी छांह देते फल,पत्ते,लकड़ी भी कितने उपयोगी होते....!! नन्ही चिरैय्या अगर ...
2
3
लोकतंत्र की लाज बचाने, वालों की पहचान करें। घर से निकलें बाहर आएं सब मिलकर मतदान करें।
3
4

हिन्दी कविता : कितने दिन हुए

मंगलवार,अप्रैल 9, 2019
कितने दिन हुए न कुछ सोचा, न लिखा!! चलो आज कविता लिखी जाए...बैठा जाए कलम ले कर.. आज तो लिखना ही है!!
4
4
5
पा न सका अब तक कोई ऊंचाई मोदी की। छू न सका अब तक कोई परछाईं मोदी की।।1।।
5
6
कोई तो है जो है तैयार, होने को जिम्मेदार। खोजता/ परखता रहा है देश, निराशा हाथ लगी हर बार।। विशाल देश की विशाल समस्याओं ...
6
7
किसको डालूं वोट रामजी सब में ही है खोट रामजी किसको डालूं वोट...
7
8
मौसमी करवटों में बदल रहा स्वरूप वन-प्रांतर का, प्रकृति नटी के गालों पर लाल पलाशी उमंग।
8
8
9

काव्य धारा : अश्रु और मैं

शुक्रवार,मार्च 15, 2019
मैं और अश्रु इसके अलावा ना था कोई और हम दोनों थे एकांत था बहुत खुश थे
9
10
रंगों से सराबोर हो हो गई मैं तो बावरी। कितने रंग देखे लाल, काले, हरे, पीले,
10
11
रंग न छूटे प्रेम का, लगे जो पहली बार, धोने से दूना बढ़े, बढ़ती रहे खुमार। पल-पल बदले रूप को, मन के रंग हज़ार,
11
12
विश्वास करेंगे कैसे वे, जिनको है नहीं विश्वास खुद पर। जो अब तक निर्णायक घड़ियों में, बस रहे झांकते इधर-उधर।।
12
13
नारी पर कविता - नारी तुम स्वतंत्र हो, जीवन धन यंत्र हो। काल के कपाल पर, लिखा सुख मंत्र हो।
13
14
नारी पर दोहे- नारी का सम्मान ही, पौरूषता की आन, नारी की अवहेलना, नारी का अपमान।
14
15
महिला दिवस पर कविता- अनंत काल से आज तक नारी ही रही है जिसने हर कठिन समय में भी
15
16
वह अभिनव अभिमन्यु गया जब व्यूह भेदने, साहसभरा, निर्भीक, मनस्वी, युद्ध विशारद। गिरा दिया लघु मिग विमान से ...
16
17
घाव जब नासूर बन जाए, गहन उपचार जरूरी है, शांत अहिंसक भाव हमारा, संहार पर मजबूरी है।
17
18
निकले थे घर से कभी, हम सपनों के साथ। इक-इक करके राह में, सबने छोड़ा हाथ॥
18
19
गुलमोहर की छांव तले नींद के आगोश में था तभी 'जयऽऽऽ शनि महराज' के उद्घोष से नींद टूटी देखा तो एक व्यक्ति तेल के अधभरे ...
19