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हिन्दी कविता : अनोखा संगम

मंगलवार,नवंबर 21, 2017
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बधाई हो, तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है, यह सुनकर हरेक पिता के पोर-पोर में एक अनचाही खुशी की उमंग दौड़ पड़ती है और ...
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आते हैं जब इस दुनिया में हम कितने सहज, सौम्य और निश्छल होते हैं। धीरे-धीरे होते हैं प्रभावित और अपनाने लगते हैं उस ...
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राजनीति का मतलब- झूठ है, छल है, दगा है। राजनीति में कौन, किसका सगा है? राजनीति का मतलब- थप्पी है, पेटी है, खोखा है। ...
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सबने मना ली दिवाली, तो सबको ही बधाई। पर एक बात बताओ यारों, किसने कैसी दिवाली मनाई?
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कविता : बचपन का जमाना

शनिवार,नवंबर 4, 2017
बड़ा याद आता है वो बचपन का जमाना, मां की गोद में सोना और दोस्तों संग पतंग उड़ाना, छोटी-छोटी बातों पर एक दूसरे से रूठ ...
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पहाडों पे लू चलती सुनी ना होगी सर्दी समन्दर किनारे ना सही होगी जाडे़ में होरी खिलती देखी ना होगी बुढापे में जवानी आई ...
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साहित्य का है प्रारंभ काल परिवर्तित होते रहे शब्द परिवर्तित होते रहे विचार तरल होते गए भाव मन में सोते गए।
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अट्ठावन में आते-आते लगने लगा है समा गए हैं मुझमें बाबूजी मेरे।
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खुश है सारा आलम, मां लक्ष्मी की मधुर मुस्कान से। नव-विकास की दीप ज्योति से, समृद्धि के नए विहान से।।1।। कालेधन की ...
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हिन्दी कविता : बाएं हाथ का खेल

शनिवार,अक्टूबर 28, 2017
आसान जिंदगी को मुश्किल में डालना मानो बांए हाथ का खेल है दिखाना जले पर नमक छिड़क कर उकसाना आग में घी डालकर और ...
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क्यूं न इस दिवाली इक प्यार का दीप जलाया जाए। किसी के घर के बुझे दीप को रोशन कर अपने दीप से उसके घर को भी
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तस्वीर का जीवन से गहरा नाता है हमारा । बचपन से ही हो जाता है तस्वीरों से सामना हमारा ।
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कविता : सबने मना ली दिवाली

मंगलवार,अक्टूबर 24, 2017
सबने मना ली दिवाली तो सबको ही बधाई पर एक बात बताओ यारों किसने कैसी दिवाली मनाई ?
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कविता : फिर बाद बरस के

सोमवार,अक्टूबर 23, 2017
फिर इस साल बाद बरस के कुछ दीप मैंने जलाए हैं अपने मन के कुछ उजियारे फिर तुझ तक पहुंचाए हैं
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कविता : राम का आह्वान

बुधवार,अक्टूबर 18, 2017
चकमक से जगमग हुआ दीया दीये से फिर जला दीया तारों से भरी रात है चांद की नहीं बात है
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तारीखें, आती हैं-जाती हैं फिर-फिर आती हैं पर समाया रहता है इनमें सृष्टि का, हम सबका कहा / अनकहा वह हिसाब, जो ...
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वतन के दीये से मनेगी दिवाली, सभी लोग मिट्टी के दीपक जलाएं। बहिष्कृत करे चीन का माल सारा, स्वदेशी सभी अब फिर से अपनाएं।
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दिवाली पर कविता : चपल दामिनी...

सोमवार,अक्टूबर 16, 2017
चांद की दुल्हनिया को देखो, बादलों में जा छुप गई, इस धरा पर दीप संग कैसे, रूप चौदस उतर रही। आंगन से देहरी तक मेरी पायल, ...
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देखा है हमने स्वच्छता /टॉयलेट मुहीम को आंदोलन बनते। लोगों के असमंजसी सोच के बीच भी, आत्मविश्वासी लघु आगाज़ से ।।1।। ...
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