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कविता : कागज का रावण

बुधवार,अक्टूबर 17, 2018
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खिन्न होता है मन, रक्षा सौदों पर होती छीछालेदर पर। उच्च पदासीनों पर जब, ओछी टिप्पणियां होतीं इधर-उधर।।1।।
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बेटी युग में खुशी-खुशी है, पर मेहनत के साथ बसी है। शुद्ध कर्म-निष्ठा का संगम, सबके मन में दिव्य हंसी है।
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सबसे महान होती हैं भारत की बेटियां, हम सबकी शान होती हैं भारत की बेटियां। जिस दिन से घर में आती हैं ...
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कविता : नारी तेरे रूप अनेक

शुक्रवार,अक्टूबर 5, 2018
मैंने पूछा लोगों से नारी क्या है? किसी ने कहा मां है, किसी ने कहा बहन, किसी ने कहा हमसफर है, तो किसी ने कहा दोस्त। ...
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देश के लिए मर मिटने वाले देशभक्तों में भगत सिंह का नाम भुलाया नहीं जा सकता। देश के प्रति उनका प्रेम, दीवानगी और मर ...
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हिन्दी कविता : प्रजापालक

शुक्रवार,सितम्बर 21, 2018
सहसा वो बालक उठता है और भरी सभा में पिता के गले लग जाता है मानो शिकायत कर रहा हो ये सब लोग मुझे चिढ़ाते हैं
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शाम हुई थका सूरज पहाड़ों की ओट में करता विश्राम। गुलाबी, पीली चादर
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साहित्य की फुलवारी, सरल-सुबोध पर है भारी। अंग्रेजी से जंग जारी, सम्मान की है अधिकारी।
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कम्प्यूटर के युग के दौर में, थोपी जा रही अंग्रेजी शोर में। आधुनिकता की कहते इसे जान, छीन रहे हैं हिन्दी का रोज मान।
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वे देश के अन्नदाता हैं वो तमाम कष्ट सह पेट पालता है तमाम जनता का अकाल, ओलावृष्टि, अतिवृष्टि
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खुशी के कारण बहुत मिलेंगे, कभी किसी की खुशी का कारण बनो। जो बांटोगे वही मिलेगा, दु:ख बांटो या सुख बांटो।
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समझना होगा, दुनिया की चाल को, बदलना होगा, खुद से अपने हालात को। ठोकर खाकर ही इंसान संभलता है,
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तरसी यशोदा, सुन सुन कान्हा अबके मेरे घर भी आना अंगना सूना आंखे सुनी इनमें ख्वाब कोई भर जाना
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दिन हो, रात हो अब युवा हिन्द के करते आराम नहीं, समाज बदल रहा है युवा, व्याकुलता का अब काम नहीं, भारत माता की वेदी पर ...
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हिन्दी कविता : तुम बदल गए

गुरुवार,अगस्त 23, 2018
तुम बदल गए। थामकर हाथ तुम्हारा, चल पडी थी सपनों में रंग भर के उम्मीद के पंख लगाकर,
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तुम्हारी देह और हमारे मन को जलाते अंगारों में हवा में घुल चुके तुम्हारे ही विचारों में आकाश के तारों में
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सूर्य उदय से सूर्यास्त तक सुनहरी गुलाबी बदलती किरणों को निहारकर शब्दों में
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बहुत उदास, बहुत निराश है आज की सुबह, अपने लाड़ले के बिना हुई है आज की सुबह।
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बदला मौसम, ढलती छाया, रिसती गागर, लुटती माया, सब कुछ दांव लगाकर घाटे का व्यापार हुआ। नए मील का पत्‍थर पार हुआ।
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