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कविता : हे भारत मां, तुझे करोड़ों हाथों से वंदन है...

गुरुवार,जनवरी 17, 2019
poem on 26 January
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पावन है गणतंत्र यह, करो खूब गुणगान। भाषण-बरसाकर बनो, वक्ता चतुर सुजान॥ वक्ता चतुर सुजान, देश का गौरव गाओ।
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गणतंत्र दिवस पर हिन्दी दोहे

गुरुवार,जनवरी 17, 2019
भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान। सब धर्मों को मान दे, रचा गया इतिहास। इसीलिए हर नागरिक, के अधरों पर हास॥ प्रजातंत्र ...
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गणतंत्र दिवस फिर आया है। नव परिधान बसंती रंग का माता ने पहनाया है। भीड़ बढ़ी स्वागत करने को बादल झड़ी लगाते हैं। ...
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झकझोरकर मुझे हवा ने अलौकिक खेल दिखाया उतार कमीज पल में
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प्यार और विश्वास से मांजा सूता, तो कटूंगी नहीं। रहूंगी हरदम, तुम्हारे साथ। क्योंकि-
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चोर कहे कि साधु लिख दो, कहे नालायक, लायक लिख दो। हजम किया जो जनता का धन, कहता नेक विधायक लिख दो।
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सब्र आ जाए इस उम्मीद में ठहर गया कोई, पास होकर भी कैसे बेख़बर गुजर गया कोई,
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पूछिए मत क्या बवाल मचा रखा है, जाने उसने जबां पे क्या छुपा रखा है, इस माहौल में खामोश रहना अच्छा,
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कविता : उस्ताद जी माफ करना

सोमवार,जनवरी 7, 2019
लम्बी कविता कहने के आदी कवि पर, किया प्रहार, मंच पर आया तो, समझ ले करवाऊंगा अंडे टमाटर से तेरा संहार, चेले के तन बदन ...
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विदा होते वर्ष अठारह की यह विदाई-आशीष हो। नवागत वर्ष किसी भी पैमाने पर न विगत वर्ष से उन्नीस हो।।1।।
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कविता : मर्ज

शनिवार,जनवरी 5, 2019
किया खूब इलाज, मर्ज निकला लाइलाज, ना आई तुझको लाज...
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नए वर्ष की भोर है, सपने नवल किशोर। धूप की चादर ओढ़कर, ठंड मचाए शोर। ऊर्जित मन आशा भरे, देखें आगत ओर। बीते ने जो भी दिया, ...
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स्वच्छता में अग्रणी, अग्रणी ख़ूबसूरती में। प्रदेश के, मालवा के, नगर सिरमौर को सलाम।।
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मिर्ज़ा ग़ालिब उर्दू के एक ऐसे शहंशाह हैं जिनका शेर जिंदगी के किसी भी मौके पर इस्तेमाल किया जा सकता है। यहां पाठकों के ...
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धूप में खुलकर ख‍लिकर खिलखि‍लाकर 1 दिन का क्रिसमस मनाकर सोच रही हूं सांता तुम कहां हो
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सूर्य उदय से सूर्यास्त तक सुनहरी गुलाबी बदलती किरणों को निहारकर शब्दों में
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बदला मौसम, ढलती छाया, रिसती गागर, लुटती माया, सब कुछ दांव लगाकर घाटे का व्यापार हुआ। नए मील का पत्‍थर पार हुआ।
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अबकी बार चुनाव में जमी नहीं भई गोटी, अब बतलाओ कौन खिलाएगा तुमको मक्खन-रोटी।
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आंखों में संभालता हूं पानी आया है प्यार शायद, खूशबू कैसी, झोंका हवा का घर में बार-बार शायद,
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