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हिन्दी कविता : प्रणवदा की सीख के निहितार्थ

सोमवार,जून 18, 2018
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जितनी जरूरी है जीवन में हमारे नदी की मिठास उतना ही जरूरी है समुद्र-सा खारापन भी।
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पिता मील का पत्थर, जो सचाई की राह बताते। पिता पहाड़, जो जिंदगी के उतार-चढ़ाव समझाते।
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भविष्यवाणी है कि इस बार पर्याप्त होगी वर्षा। प्रफुल्लित मन ने कहा -'आमीन -आमीन'! आमीन का अर्थ है 'तथास्तु' 'बस ऐसा ही ...
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मैंने लगाई थी एक अर्जी, धूप के दरबार में, मान ली सूर्य ने, जो भी थी फरियाद वे।
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मोहे हर जनम बिटिया ही कीजो, वही मेरे बाबुल का आंगन दीजो, वही नीम छैयां सा कानन दीजो, भीगता था जहां प्यारा-सा बचपन,
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आओ! पौधे लगाएं अपनी धरा को सुंदर बनाएं वातावरण को स्वच्छ बनाएं। आओ मिलकर पौधे लगाएं
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चालीस डिग्री गर्मी को भूल गए हम। अब तो पैंतालिस का ही सामान्य चलन है। पहले नव तपा होता था फक्त नौ दिन,
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कविता : दुख नगरी

गुरुवार,मई 24, 2018
दुख नगरी से मन है, भागे, जाना चाहे है सुख नगरी, ईश्वर की इच्छा पर निर्भर, जैसे भर दे जीवन गगरी।
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इस चाराग़री में सब होशियार हैं, वर्ना खुद से ही कौन गुनाहगार है ।।1।। कमी है कुछ झुके हुए मस्तकों की वर्ना तलवारें तो सब ...
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इसमें तुम्हारा दोष कतई नहीं है कि तुम आदमियत से हैवानियत की ओर मुड़ते
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तुम, सचमुच महान हो शिल्पकार- तुम्हारे हाथ नहीं दुलारते बच्चों को
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चिड़िया अब नहीं लाती दाना घोंसले में छिपे बच्चों के लिए जो, अब लगने लगे हैं
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खबर है कि डिफेंस बजट में बढ़ोतरी के ऐलान में। षड्यंत्र देख उभरा है जनविरोध पाकिस्तान में। भोली, नासमझ जनता को रखा जाता ...
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जिंदगी के एहसास में, ओ हर वक़्त रहती, कभी सीख बनकर, कभी याद बनकर,
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आम्र वृक्ष मंजरियों से लदे हैं, तुम भी तो ऐसी ही हो , प्रेम और स्नेह से लदी हुई हमेशा। खेतों में फूल रही है ...
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मां, तुम जिस सूर्य को अर्घ्य देती हो वही सुबह मेरा दरवाजा खटकाता है, तुम जिस पूनम के चांद को पूए चढ़ाती हो वही मेरी ...
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आशारहित दिनों में तुम कठिन शब्दों का अर्थ समझाती हो पता नहीं मां तुम किस स्कूल में पढ़ी हो कितनी कक्षा तक?
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मां, तुम उदास मत होना, कि तुम्हारे लिए सिर्फ एक दिन रखा गया जब तुम्हें याद किया जाएगा! बस, यह मनाओ कि बचा रहे ...
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भावनाओं का निर्मल सलिल, हृदय से गुजरते ही, दर्द की आग में उबल पड़ता है।
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