बाल कविता: भिंडी जैसी मिर्ची

भिंडी समझे एक मिर्च को,
खा गए पूरी-पूरी।
जीभ जली तो चिल्लाने की,
ही थी अब मजबूरी।
गए खेत में उस को,
लगे डांटने भाई।
जिसने भिंडी के जैसे ही,
मिर्ची वहां उगाई।

मिर्ची तो चिकनी होती है,
भिंडी धारी वाली।
उस किसान ने कहा आपकी,
मुंडी दिखती खाली।


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