बाल गीत : योजना पर पानी...


 
 
एक में चालीस दाढ़ी,
का आया।
खुशियों के मारे चूहे ने, 
कत्थक नाच दिखाया।
 
बोला, पैसे खूब बचेंगे, 
खुश हो बैठे भारी।
इन पैसों से मोबाइल ले, 
लूंगा बात बिचारी।
 
बोली चुहिया किंतु आप तो, 
दाढ़ी नहीं बनाते।
दाढ़ी-मूंछों के खर्चे में, 
दमड़ी नहीं लगाते।
 
गुस्से में चूहा चिल्लाया, 
चुप जा मेरी नानी, 
मेरी बनी योजना पर तू, 
रोज फेरती पानी।

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