बहुत सी अनुकूलताएं हैं नव वर्ष में भारत के लिए

वर्ष 2019 का स्वागत। पाठकों को की शुभकामनाएं। नव वर्ष के स्वागत में आइए हम विश्व की केवल उन्हीं ख़बरों और घटनाओं का विश्लेषण करें जो सहित विश्व को इस वर्ष सकारात्मक रूप से प्रभावित करेंगी।

बांग्लादेश में शेख हसीना पुनः भारी बहुमत से निर्वाचित हुईं। यद्यपि उन पर चुनावों में धांधली के आरोप हैं और दुनिया में उनकी आलोचना भी हुई है किंतु भारत इस विषय पर कुछ नहीं बोलना चाहेगा क्योंकि भारत की जो चिन्ताएं बांग्‍लादेश को लेकर थीं वे शेख हसीना की सरकार के दौरान निश्चित रूप से कम हुई हैं। विशेषकर आतंकवादियों और अतिवादियों पर उन्होंने लगाम कस रखी है, रोहिंग्या लोगों को भारत में धकेल नहीं रहीं हैं और अर्थव्यवस्था में अच्छी प्रगति अच्छी होने से बांग्लादेशी घुसपैठियों से भारत को जूझना नहीं पड़ रहा है। अतः शेख हसीना सरकार का बने रहना भारत के हित में है।

श्रीलंका में दो माह पूर्व राष्ट्रपति सिरिसेना ने पूर्व प्रधानमंत्री राजपक्षे के साथ मिलकर साजिश की और वैधानिक रूप से निर्वाचित सरकार के भारत समर्थक प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे की सरकार को बर्खास्त कर राजपक्षे को सत्ता दे दी थी। राजपक्षे को न तो सदन में बहुमत मिला और न ही सुप्रीम कोर्ट का साथ। सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी सरकार को अवैध घोषित कर दिया। राष्ट्रपति सिरिसेना को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा और अवैध तरीके से हटाई गई सरकार को पुनः स्थापित करना पड़ा। चूंकि विक्रमसिंघे भारत समर्थक हैं, अतः आने वाले वर्षों में श्रीलंका में चीन की गतिविधियां कम ही रहेंगी जो कूटनीतिक दृष्टिकोण से भारत के हित में है। उसी तरह मालदीव में भी भारत की मित्र सरकार आ जाने से हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक चिंताएं और भी कम हुई हैं।

जहां तक पाकिस्तान का प्रश्न है, इमरान के नेतृत्व में बनी सरकार पर आतंकी गतिविधियों की रोकथाम के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा दबाव है। अब यह निश्चित है कि ट्रंप सरकार किसी भी तरह की मुफ्त सहायता नहीं देती है। यदि उनकी हिदायत के अनुसार काम नहीं तो पैसा भी नहीं। ट्रंप की खास बात यह है कि वे राजनीतिज्ञ नहीं हैं। जो सोचते है वह बोल देते हैं। किसी की परवाह नहीं करते और न ही दोमुंही बात करते हैं। पाकिस्तान को कई बार दो टूक सुना चुके हैं। इसलिए सहायता राशि से वंचित पाकिस्तान को अब आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया करने की मुश्किल बनी रहेगी जिसका सीधा लाभ भारत को मिलेगा।

उधर चीन लगातार अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर दबाव में है। ट्रंप चाहते हैं कि चीन, अमेरिका को जितने मूल्य का माल बेचता है उतने ही मूल्य का सामान ख़रीदे। इसलिए चीन अभी भारत से कोई पंगा नहीं लेना चाहेगा क्योंकि उसे भारत के साथ व्यापारिक सहयोग चाहिए। यही वजह है कि उत्तरी सीमा पर शांति बने रहने के आसार हैं। मध्य पूर्व में शांति स्थापित होती दिख रही है जो विश्व के लिए तो अच्छा है ही, भारत के लिए भी व्यवसाय के नए अवसर खुलेंगे। ईरान को लेकर अमेरिका का रुख इतना कड़ा नहीं है, अतः भारत को ईरान के साथ भी व्यापार बढ़ाने के अच्छे अवसर मिलेंगे।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के गिरते दामों से भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती आती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति पूरे वर्ष बनी रहेगी। रुपया पुनः मज़बूत हुआ है। पिछले वर्ष तेल के भावों से आम जनता से लेकर सरकार तक परेशान थी किंतु बदली हुई परिस्थितियों में सरकार के पास विकास के मद में खर्च करने के लिए अब अधिक धन उपलब्ध रहेगा।

और अंत में विराट कोहली की टीम ने वर्ष के अंत में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध जो जीत दर्ज की है उससे निश्चित ही भारतीय टीम का मनोबल ऊंचाइयों पर होगा और हम विश्वास करें कि वर्तमान टीम इस वर्ष सफलता के नए सोपान चूमेगी। कुल मिलाकर गत वर्ष की अपेक्षा नव वर्ष में संसार के सामने चुनौतियां कम हैं, अतः उम्मीद है कि भारत इन सभी अनुकूल परिस्थितियों का लाभ उठा सकेगा। आमीन।


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