अमृता प्रीतम की याद में बहती अमृता-धारा

इस बार ब्लॉग चर्चा में रंजना भाटिया का ब्लॉग

amrita pritam <a class="storyTags" href="/search?cx=015955889424990834868:ptvgsjrogw0&cof=FORID:9&ie=UTF-8&sa=search&siteurl=http://hindi.webdunia.com&q=Blog" target="_blank">blog </a>charcha
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कहते हैं कि हमारे देश में कुछ भाषाएँ ऐसी हैं जिनके लेखकों से उनके पाठक बेपनाह मोहब्बत करते हैं। उन्हें वे खूब पढ़ते-गुनते हैं। उनकी नई रचनाओं और नई किताबों का बेसब्री से इंतजार करते हैं। वे खोज-खोजकर पढ़ते हैं। जैसे बांग्ला को ले लीजिए। किसी बांग्ला भाषी से बात करो तो वह विभूतिबाबू से लेकर बिमल मित्र, शरतचंद्र से लेकर रवीन्द्रनाथ ठाकुर और सुनील गंगोपाध्याय तक की बातें खूब करेगा। उनके बारे में, उनके लेखन के बारे में उसे तमाम जानकारियाँ हासिल होती हैं। इसी तरह मराठी और मलयाली भाषियों में अपने लेखकों के प्रति प्रेम और श्रद्धा देखी-महसूस की जा सकती है।

गैर हिंदी भाषाओं में कई लेखक हुए हैं जिन्हें हिंदी पाठक पूरी शिद्दत के साथ पढ़ते हैं, उनसे मोहब्बत करते हैं। पंजाबी लेखिका अमृता प्रीतम ऐसी ही लेखिका हैं जिन्हें हिंदी में भी खूब पढ़ा जाता है। ब्लॉग दुनिया की रंजना भाटिया उनसे बेपनाह मोहब्बत करती हैं। वे अमृता की लिखी हर बात, हर कहानी, हर उपन्यास, हर कविता को खोज-खोजकर पढ़ती हैं। गुनती हैं। लिखती हैं।

amrita preetam
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उनकी यह दीवानगी उनके ब्लॉग में सहज ही देखी जा सकती है। ब्लॉग की दुनिया में ऐसे कुछ ब्लॉग हैं जो किसी खास रचनाकारों पर केंद्रित हैं। जैसे गुलजार और आनंद बक्षी पर केंद्रित ब्लॉग। लेकिन रंजनाजी का यह ब्लॉग इस अर्थ में अलग है कि इसमें अमृताजी के तमाम रूपों और रूहों के भी दर्शन हो जाते हैं।

इस ब्लॉग के हैडर पर अमृताजी का एक खूबसूरत पोर्ट्रेट लगा हुआ। एक खूबसूरत कविता स्थायी तौर पर मुख पृष्ठ पर पढ़ी जा सकती है और उनके इस ब्लॉग के 34 फालोअर हैं। जाहिर है यह एक लोकप्रिय ब्लॉग है। रंजनाजी अपनी एक पोस्ट में लिखती हैं कि-अमृता जी के बारे में जितना लिखा जाए मेरे ख्याल से उतना कम है , जैसा कि मैंने अपने पहले लेख में लिखा था कि मैंने इनके लिखे को जितनी बार पढ़ा है उतनी बार ही उसको नए अंदाज़ और नए तेवर में पाया है। उनके बारे में जहाँ भी लिखा गया मैंने वह तलाश करके पढ़ा है।

एक बार किसी ने इमरोज़ से पूछा कि आप जानते थे कि अमृताजी साहिर से दिली लगाव रखती हैं और फ़िर साजिद पर भी स्नेह रखती हैं आपको यह कैसा लगता है ?

इस पर इमरोज़ जोर से हँसे और बोले कि एक बार अमृता ने मुझसे कहा था कि अगर वे साहिर को पा लेतीं तो मैं उनको नही मिलता तो मैंने उनको जवाब दिया था कि तुम तो मुझे जरूर मिलतीं चाहे मुझे तुम्हें साहिर के घर से निकालकर लाना पड़ता "" जब हम किसी को प्यार करते हैं तो रास्ते की मुश्किल को नहीं गिनते। मुझे मालूम था कि अमृता साहिर को कितना चाहती थीं लेकिन मुझे यह भी बखूबी मालूम था कि मैं अमृता को कितना चाहता था !"

अमृता-साहिर-इमरोज के कई किस्से-कहानियाँ हवाओं में खुशबू की तरह बिखरे हैं। वे गाहे-बगाहे सुंदर-कोमल फूलों की तरह लोगों की स्मृतियों में खिलते रहते हैं। लेकिन यह खुशबू और फूल यहाँ आपको हमेशा मिलेंगे। इस ब्लॉग पर रंजना कभी इमरोज के बारे में, कभी अमृता के बारे में , कभी साहिर के बारे में कोई संस्मरण, कोई याद, कोई प्रसंग सुनाती रहती हैं। कभी इमरोज-अमृता के बारे में, कभी अमृता-साहिर के बारे में, कभी अमृता-साहिर-इमरोज के बारे में।

रवींद्र व्यास|
लेकिन मुख्यतः यह ब्लॉग अमृता की जादुई और रूहानी शख्सियत के बारे में, उनके रचनाकर्म के बारे में बातें करता है। बहुत ही सहज ढंग से। आत्मीयता के साथ। कभी किसी भावुकता में, कभी किसी रूमानियत में। यहाँ किसी भी तरह की नकली और ओढ़ी हुई व नकली धीर-गंभीर बातें नहीं हैं। यहाँ लेखक को, उसके जीवन को, उसके रचना-कर्म और मर्म को जानने-समझने की एक विनम्र कोशिश दिखाई देती है। यहाँ कोई आलोचकीय वक्तव्य नहीं है, कोई आलोचकीय टिप्पणियाँ नहीं हैं, बल्कि एक सहृदय पाठक का खुला-खिला दिल है जिसमें से सादा लफ्जों में बातें निकलती हैं और दिल को छू जाती हैं।

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