'स्त्री' देखकर मर्द को दर्द होगा : श्रद्धा कपूर

कैसी है 'स्त्री' फिल्म?
यह 'स्त्री' लोगों को डराना भी चाहती है, उनका मनोरंजन भी करना चाहती है। यह एक हॉरर-कॉमेडी फिल्म है। मैं पहली बार ऐसी फिल्म का हिस्सा बनी हूं। इसमें एक मैसेज भी है, लेकिन उसे भाषण की तरह नहीं दिखाया गया है। इसका कॉन्सेप्ट ही बहुत इंट्रेस्टिंग है।
क्या मर्द को फिल्म देखकर दर्द होगा?
इस फिल्म में मर्द को दर्द होगा। हमने एक छोटे से शहर चंदेरी में केवल 40 दिनों में यह फिल्म शूट की। वहां फिल्म शूट करते हुए मुझे बहुत अच्छा लगा, क्योंकि शहर की भागमभाग से भी एक ब्रेक मिला।

आपने चंदेरी से कुछ खरीदा?
मैंने मां, मासी, लताजी, आशाजी, मीनाजी और उषाजी सबके लिए चंदेरी साड़ियां भी खरीदीं।\
और पंकज त्रिपाठी के साथ काम करना कैसा रहा?
बहुत ही बढ़िया रहा। राजकुमार एक मंझे हुए एक्टर हैं, साथ ही पंकजजी की मौजूदगी से सेट पर माहौल बड़ा ही बेहतरीन रहता था। लगा ही नहीं कि हम लोग शूटिंग कर रहे थे।

हीरो-हीरोइन की फीस के बारे में क्या कहेंगी?
मुझे इंडस्ट्री की अच्छी बात यह लगती है कि आज हीरोइनों को भी इतना काम मिल रहा है। यहां हीरो वाली फिल्में हैं, तो एक्ट्रेसेज के लिए भी ऐसे रोल हैं जिसमें वे अपनी छाप छोड़ सकती हैं। एक्ट्रेसेज के लिए हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि आजकल कंटेंट वाली फिल्में चल रही हैं, जो इंडस्ट्री और हम सबके लिए बहुत अच्छा दौर है।
चंदेरी में कुछ भूतिया घटनाएं भी हुईं?
रात में शूटिंग को लेकर चंदेरी के लोगों ने टीम को हिदायत दी थी कि वे सुनसान सड़क पर रात को शूट न करें। हालांकि टाइट शेड्यूल की वजह से टीम ने इस हिदायत को नजरअंदाज कर दिया और रात को तय सड़क पर शूटिंग शुरू की और कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

अनुष्का प्रोड्यूसर बन गई हैं, आपका क्या प्लान है?
मेरा मानना है कि अगर किसी को प्रोड्यूसर बनना है, तो उन्हें जरूर बनना चाहिए। यह दूसरों के लिए बहुत इंस्पायरिंग है। मैं अपनी बात करूं, तो मुझे नहीं लगता कि मैं प्रोड्यूसर बनना चाहूंगी। क्लोदिंग लाइन का भी कोई इरादा नहीं है। अभी मैं जो ब्रैंड्स मैं इंडॉर्स कर रही हूं, उसमें ही खुश हूं। अभी मैं सिर्फ अच्छे काम करने पर फोकस करना चाहती हूं। अच्छी और यादगार फिल्मों का हिस्सा बनना चाहती हूं।
फिल्म के न चल पाने का दुःख होता है?
यह हिस्सा है हमारे प्रोफेशन का। उतार-चढ़ाव तो आना ही है। उसके साथ-साथ लोगों का नजरिया भी बदलता है, लेकिन यह हमारे पेशे का हिस्सा है। मेरी खुशकिस्मती यह है कि मेरे पास इतनी सारी अच्छी फिल्में हैं। 'साहो' के अलावा मेरे लिए फिल्म 'बत्ती गुल मीटर चालू' भी बहुत खास है, वहीं साइना नेहवाल की बॉयोपिक के लिए अभी ट्रेनिंग चल रही है। उसकी शूटिंग अगले महीने शुरू होगी।


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