मुक्काबाज : असली मुक्कों से गूंगी हीरोइन तक

भारतीय फिल्म उद्योग में पिछले कुछ समय से स्पोर्ट्स फिल्मों का चलन काफी बढ़ गया है। शाहरुख़ की चक दे इंडिया से लेकर फरहान की भाग मिल्खा भाग व प्रियंका की मैरी कॉम ने भारतीय दर्शकों के दिमाग से रोमांस का बुखार कुछ कम कर स्पोर्ट्स फिल्मों की तरफ रुझान बढ़ाया है। इन फिल्मों को अवार्ड समारोह समेत बॉक्स ऑफिस में मिली सफलता ने अन्य निर्माताओं को भी स्पोर्ट्स फिल्में बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। इन फिल्मों ने कहीं न कहीं अर्थहीन सिनेमा के दौर की तरफ बढ़ रहे हिंदी सिनेमा जगत को भी एक दिशा देने का काम किया है।

इसी कड़ी में 12 जनवरी को एक और फिल्म रिलीज होने जा रही है, नाम है मुक्काबाज। निर्माता-निर्देशक की इस फिल्म का ट्रेलर लोगों के बीच लोकप्रिय होने में सफल रहा है। यदि आप अनुराग की अन्य फिल्में उठाकर देखें तो पाएंगे कि सिनेमा को देखने की उनकी नजर बाकियों से थोड़ी अलग है, जिसका असर उनकी फिल्मों पर भी नजर आता है।

मुक्काबाज को लेकर कहा जा रहा है कि बॉक्सिंग की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म आम स्पोर्ट्स फिल्म से कई मायनों पर अलग है। यह वैसी फिल्म नहीं है जिसका अंत भारतीय खिलाड़ियों की जीत पर बजने वाले राष्ट्रगान से होता है। फिल्म में गुंडाराज व जातिवाद पर खिलाड़ियों के संघर्ष व प्यार को कश्यप के अंदाज में पिरोया गया है। वैसे तो इस फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश की है, लेकिन अनुराग इस बारे में कहते हैं कि यह कहानी सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि हर उस राज्य की है जहां बॉक्सिंग का थोड़ा बहुत नाम है।

इस फिल्म के बनने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है, जिसमें संघर्ष, जोश व जुनून सबकुछ नजर आता है। यही वजह है कि इसे आम स्पोर्ट्स फिल्म से अलग कर के देखने की जरूरत है। आइए जानते हैं वे प्रमुख बिंदु जो इस फिल्म को खास बनाते हैं।

1. फिल्म की कहानी, मुख्य भूमिका निभा रहे व मुक्ति सिंह श्रीनेत के द्वारा साल 2013 में लिखी गई थी। तब से ही विनीत फिल्म निर्माताओं के बीच यह कहानी लेकर घूम रहे थे। फिल्म बनाने को लेकर विनीत की यह शर्त थी कि मुख्य भूमिका वे ही निभाएंगे, लेकिन इस शर्त को लेकर कोई भी निर्माता फिल्म बनाने के लिए तैयार नहीं था। इसी दौरान विनीत अपनी कहानी लेकर अनुराग से मिले, जिन्हें कहानी दिलचस्प लगी और उन्होनें इसमें कश्यप तड़का लगाने के लिए हामी भर दी।

2. अनुराग, विनीत को मुख्य भूमिका में लेकर फिल्म बनाने के लिए तैयार तो हो गए, लेकिन अपने अंदाज में। उन्होनें विनीत के सामने यह शर्त रखी कि फिल्म में काम करने से पहले उन्हें बॉक्सिंग सीखनी होगी। बॉक्सिंग भी कोई निम्न दर्जे की नहीं, बल्कि ऐसी कि विनीत खुद रिंग में उतरकर असली मुक्केबाजों को चित्त कर सकें। इसके बाद विनीत ने मुंबई में अपनी कठिन ट्रेनिंग शुरू कर दी।

3. फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के बरेली के इर्द गिर्द घूमती है और सच्ची घटनाओं से प्रेरित है। कश्यप के अनुसार नरसिंह पंचम यादव का मामला व बॉक्सिंग की वजह से वे इस फिल्म के प्रति आकर्षित हुए। गौरतलब है कि नरसिंह पंचम यादव भारत के पूर्व मुक्केबाज हैं, जो 2010 में आयोजित हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। बाद में डोपिंग के आरोपों में फंसने के बाद उनका बॉक्सिंग करियर समाप्त हो गया।

4. फिल्म की तैयारियों के दौरान अनुराग ने अपने एक यूनिट डायरेक्टर को असली स्टेट बॉक्सिंग टूर्नामेंट शूट करने के लिए भेजा। कैमरे में कैद हुई इन बॉक्सिंग टूर्नामेंट की सच्चाई देश के खेलप्रेमियों का दिल तोड़ सकती है। फिल्म में दिखाए गए बॉक्सिंग टूर्नामेंट के दृश्य असली टूर्नामेंट्स की नकल हैं, जिसमें एक छोटे से टेंट में ये टूर्नामेंट बिना दर्शकों के आयोजित किए जाते हैं। इन खेलों को देखने के लिए साथी खिलाड़ियों के अलावा और कोई भी मौजूद नहीं होता है।

यदि क्रिकेट व कुछ अन्य गिनें-चुने खेलों को छोड़ दिया जाए तो देशभर में खेल जगत का यही हाल है। अनुराग स्वयं कहते हैं कि भारतीय फिल्मों में बॉक्सिंग को प्रो-बॉक्सिंग के रूप में चकाचौंध से भरपूर दिखाया जाता है, जो सरासर गलत है। दरअसल भारत में प्रो-बॉक्सिंग जैसा कुछ मौजूद ही नहीं है। सरकार की तरफ से इन खेलों को फंडिंग सिर्फ इसीलिए दी जाती है, क्योंकि ये फंडिंग देनी होती है। प्रमुख सवाल यह है कि क्या सिर्फ थोड़ी बहुत फंडिंग देने से ही इन खेलों का विकास संभव है?
5. फिल्म में दिखाए गए बॉक्सिंग टूर्नामेंट के लिए असली मुक्केबाजों को लिया गया है। फिल्म के अंत में विनीत जिस बॉक्सर से लड़ते दिखेंगे वे दीपक राजपूत हैं, जो भारत की ओर से पूर्व बॉक्सिंग चैंपियन रह चुके हैं। इसके अलावा टेक्निकल राउंड में विनीत, नीरज गोयत से भिड़ते नजर आएंगे। गोयत बॉक्सिंग में मौजूदा एशियाई चैंपियन हैं।

6. मुक्काबाज में बॉक्सिंग के दृश्य फिल्माने के लिए किसी भी कोरियोग्राफर या एक्शन एक्सपर्ट की मदद नहीं ली गई है। इसमें आपको नजर आने वाले बॉक्सिंग दृश्य विनीत व अन्य मुक्केबाजों के बीच असली बॉक्सिंग के दौरान शूट किए गए हैं। आप यह भी कह सकते हैं कि फिल्म में नजर आने वाले बॉक्सिंग दृश्य काफी हद तक असली हैं, फ़िल्मी नहीं।

7. फिल्म में मुख्य किरदार निभा रहे विनीत को आपने बॉम्बे टॉकीज व अग्ली जैसी फिल्मों में भी देखा है। मुक्काबाज के लिए तैयारियां करते हुए विनीत की पसलियां टूट गई थी। यह बात उन्होनें अनुराग से भी छुपा कर रखी ताकि फिल्म की शूटिंग प्रभावित न हो सके। शूटिंग के दौरान विनीत का हाथ भी टूटा, जिसके बाद दो महीनों के लिए फिल्म की शूटिंग रोक दी गई थी।

8. मुक्काबाज में विनीत के साथ अभिनेत्री ज़ोया हुसैन मुख्य किरदार में हैं। फिल्म में मुख्य अभिनेत्री को गूंगी दिखाया गया है। इसके पीछे भी एक दिलचस्प वजह है। अनुराग ने अपने एक इंटरव्यू में इस बारे में बताया था कि फिल्म की पृष्ठभूमी यूपी की है। यहां की महिलाएं सुनती सब हैं, पर बोलती नहीं हैं। शायद उनके बोलने की जरूरत भी किसी को महसूस नहीं होती। इसीलिए फिल्म में सुनैना (ज़ोया) का किरदार इन्हीं महिलाओं को दर्शाते हुए गूंगे के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

9. फिल्म में संगीत देने वाली रचिता अरोरा की भी यह पहली फिल्म ही है। अनुराग ने रचिता को अपने पार्किंग लॉट के बाहर प्रस्तुति देते हुए सुना था। अनुराग को जब पता चला कि गाने की धुन रचिता ने ही कंपोज की है, वे उसे अपने ऑफिस ले गए और इस फिल्म में काम करने का प्रस्ताव दे बैठे।

10. अनुराग कश्यप, या कहा जाए विनीत कुमार सिंह की मुक्काबाज को 2017 में आयोजित हुए मामी फिल्मोत्सव में दिखाया गया था। जहां इसे लोगों की भरपूर सराहना के साथ ही स्टैंडिंग ओवेशन भी मिला। इसके अलावा फिल्म 2017 टोरंटो फिल्म महोत्सव में भी काफी वाह-वाही बटोर चुकी है।

भाग मिल्खा भाग, सुल्तान व दंगल जैसी फिल्में देख चुके भारतीय दर्शक मुक्काबाज को कैसी प्रतिक्रिया देते हैं ये तो 12 जनवरी के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन अनुराग व विनीत ने इस फिल्म को जिस लगन व मेहनत के साथ बनाया है वह वाकई काबिले तारीफ है।

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