नरेन्द्र भाले

नरेन्द्र भाले शौकिया तौर पर पिछले तीन दशकों से खेल और संगीत पर अपनी कलम का जादू बिखेर रहे हैं। खुद खिलाड़ी रहे नरेन्द्र को इंदौर ही नहीं वरन पूरा प्रदेश भली भांति जानता है। उनकी शैली बिलकुल अलग और अनोखी है, जो पाठक को अंत तक बांधे रखती है।

थप्पड़ से डर नहीं लगता, विराट का प्यार ही काफी है...

सोमवार,मार्च 28,2016

विराट जले, मगर अगरबत्ती की तरह...

रविवार,मार्च 20,2016

हौसले के आगे सारे लक्ष्य बेमानी

शनिवार,मार्च 19,2016

'बुमराह' कर सकता है 'गुमराह'

शनिवार,मार्च 19,2016

बेचारे अंग्रेज केवल 'छक्कों' से ही हार गए...

गुरुवार,मार्च 17,2016

बड़े बेआबरू होकर 'घर' से हम निकले...

गुरुवार,मार्च 17,2016