माघ पूर्णिमा और ग्रहण का संयोग, स्वयं विष्णु क्षीरसागर से देते हैं आशीष


माघ माह में माघी पूर्णिमा का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। ग्यारहवें महीने में कर्क राशि में चंद्रमा और मकर राशि में सूर्य प्रवेश करता है तब माघ पूर्णिमा का पवित्र योग बनता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से शोभायमान होकर अमृत की वर्षा करते हैं। इसके अंश वृक्षों, नदियों, जलाशयों और वनस्पतियों में होते हैं।
माघ पूर्णिमा में स्नान दान करने से सूर्य और चंद्रमा युक्त दोषों से मुक्ति मिलती है। माघ पूर्णिमा के दिन माघ मेले का आयोजन किया जाता है। स्नान और दान के बाद श्रद्धालु पूजा-पाठ, यज्ञ आदि करते हैं।

माघ माह की पूर्णिमा को है। इसी दिन खग्रास चंद्रग्रहण भी है। माघ माह को बत्तीसी पूर्णिमा व्रत भी कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार माघी पूर्णिमा के दिन अन्न दान और वस्त्रदान का महत्व माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान के बाद गरीबों को भोजन करवाया जाता है। इस दिन किया गंगा स्नान मोक्ष की प्राप्ति कराता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार भगवान विष्णु क्षीरसागर में विराजते हैं और गंगा का जल क्षीरसागर का ही रुप माना जाता है। इस दिन स्वयं विष्णु क्षीरसागर से उन भक्तों को आशीर्वाद देते हैं जो गंगा में स्नान करते हैं। सूर्य और चंद्रमा के दोषों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन स्नान किया जाना अत्यंत शुभ है।

पद्मपुराण के अनुसार माना जाता है कि माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करने वाले पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा रहती है और सुख-सौभाग्य, धन-संतान की प्राप्ति होती है। माघ माह की पूर्णिमा में कृष्ण भक्ति आनंद, सुख और सौभाग्य देने वाली मानी गई है। भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण की भक्ति से सरस, सहज और सौभाग्यशाली जीवन प्राप्त किया जा सकता है। पूर्णिमा तिथि को श्रीकृष्ण पूजन भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन सभी देव प्रयाग में आकर स्नान करते हैं जिस कारण प्रयाग में मेले का आयोजन किया जाता है और लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। माघ पूर्णिमा के दिन व्रत करने वाले सत्यनारायण की कथा का पाठ करते हैं।

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