महायोगी स्वामी सत्यानंद का महाप्रयाण

- विष्णु राजगढ़िया

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में और देवघर में जैसे विश्व प्रसिद्ध केंद्रों की स्थापना करने वाले सरस्वती ने पाँच दिसंबर की अर्द्धरात्रि में किया । इससे दुनिया भर में फैले ऐसे भक्तों को आघात पहुँचा, जो स्वामी जी के व्यक्तित्व और विचारों से प्रभावित हैं। दुनिया भर में स्वामी जी के अनुयायियों और प्रशंसकों की बड़ी संख्या है।

रिखिया आश्रम में होने वाले शतचंडी महायज्ञ में दुनिया भर से बड़ी संख्या में भक्तों का आगमन होता है। इनमें ऐसे भक्तों की भी बड़ी तादाद होती है, जो अतिमहत्वपूर्ण व्यक्ति की श्रेणी में आने के बावजूद आश्रम में एक सामान्य जन के रूप में रहते हैं और अपनी विशिष्ट पहचान छुपाए रखते हैं।

पिछले साल ऐसे ही आयोजन में फिल्म अभिनेता सलमान खान की बहन और परिजनों की उपस्थिति चर्चा का विषय बनी थी। स्वामी सत्यानंद जी के उत्तराधिकारी स्वामी निरंजनानंद जी ने रिखिया आश्रम का दायित्व संभाल लिया है।
स्वामी सत्यानंद का जन्म 23 दिसंबर 1923 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में हुआ था। उनके पिताजी ब्रिटिश शासन में पुलिस अधिकारी थे तथा उनकी माँ नेपाल के राजघराने की थीं। अपने माता-पिता की एकलौती संतान सत्यानंद ने बचपन से ही धर्म और अध्यात्म में गहरी दिलचस्पी दिखाना प्रारंभ कर दिया था। उन्हें अपने आध्यात्मिक गुरु की प्रबल तलाश थी और वह इसके लिए काफी घूमा करते थे।
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आखिरकार, में से वह काफी प्रभावित हुए तथा उन्हें अपना गुरु मान लिया। स्वामी शिवानंद ने उन्हें योग और अध्यात्म में परिपक्व किया तथा 1943 में संन्यास की दीक्षा दी। इसके बाद वह भारत भ्रमण तथा विश्व भ्रमण पर निकल पड़े। अफगानिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, बर्मा, तिब्बत इत्यादि देशों में भ्रमण करके उन्होंने योग और अध्यात्म के क्षेत्र में अपनी विशिष्टता से काफी प्रसिद्धि हासिल की।
स्वामी सत्यानंद ने 1963 में मुंगेर में तथा बिहार योग विद्यालय की स्थापना की। इसमें दिया जाने वाला योग का प्रशिक्षण अंतरर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। यहाँ कई महत्वपूर्ण योग सम्मेलन भी स्थापित हुए। बिहार योग विद्यालय ने दुनिया भर में योग विद्या को लोकप्रिय बनाने तथा बड़ी संख्या में योग शिक्षकों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
स्वामी जी ने 1990 में देवघर के समीप रिखिया पंचायत में रिखिया आश्रम की स्थापना की। यह आश्रम भी योग और अध्यात्म का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। यहाँ आसपास के 200 से भी ज्यादा बच्चों को अध्यात्म, कंप्यूटर और योग की निःशुल्क शिक्षा दी जाती है।

पहले फोटो में : महाप्रयाण में लीन स्वामी सत्यानंद सरस्वती और उनके उत्तराधिकारी निरंजन नंद जी महाराज


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