हम हिंदुस्तानी : भारतीयता की शिनाख्त

भारतीयता को समझाती सहज पुस्तक

book review
ND
प्रख्यात मनोविश्लेषक तथा और उनकी पत्नी की 'हम हिंदुस्तानी' भारतीयता की वास्तविक पहचान एक भारतीय की सांस्कृतिक आनुवंशिकता की शिनाख्त करती है। इस किताब का मकसद भारतीयता की एक संयोजित छवि प्रस्तुत करना है जिसमें, बकौल लेखक, भारतीय खुद को पहचान सकेंगे और दूसरों की नजर में उनकी पहचान बने।

यह भारतीयता को गढ़ने वाले कारकों -परिवार, जाति, धर्म के साथ ही लैंगिकता, आयुर्वेद पर आधारित स्वास्थ्य संबंधी अवधारणा और मोक्ष पर आधारित है। किताब में लेखक ने कुछ ध्यान देने योग्य स्थापनाएँ की हैं। मसलन भले ही आज विभिन्न दबावों के तहत संयुक्त परिवार बिखर रहे हों फिर भी एक 'मनोवैज्ञानिक संयुक्तता' लगातार बनी हुई है। इसी प्रकार 'जाति का आंतरिक अनुभव' अध्याय में की गई यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है कि 'यह दबे हुए जातीय मानक' ही होते हैं जो व्यक्ति के 'सही काम' या 'धर्म' को परिभाषित करते हैं।'

यहाँ जाति के संबंध में 'गंदगी'और काले रंग से जुड़े मनोविज्ञान को भी स्पष्ट किया गया है। भारतीय पितृसत्तात्मक समाज के बारे में यह अवलोकन महत्वपूर्ण है कि भारत में 'बेटों की वरीयता उतनी ही पुरानी है जितना कि भारतीय समाज खुद।' यहाँ पारंपरिक विवाह को भी कई कोणों से समझने की कोशिश की गई है। यह किताब एक तरह से लैंगिकता का इतिहास बयान करती है।

भारतीयों के स्वास्थ्य और मृत्यु संबंधी विचारों पर लेखक की टिप्पणी है कि 'पारंपरिक भारतीय दृष्टिकोण बुरे स्वास्थ्य को शरीर और पर्यावरण के बीच अवरोध के तौर पर देखता है।' इस किताब की बड़ी कमजोरी यह है कि उच्चवर्गीय हिंदू ही यहाँ भारतीय का प्रतिनिधि है। दलित या आदिवासी इसके दायरे में नहीं हैं। कमजोर अनुवाद ने भी इस को क्षति पहुँचाई है। यह कहा जा सकता है कि हिंदी पाठकों के लिए यह किताब भारतीयता को समझने में मददगार साबित होगी। इसे एक अनिवार्य किताब की तरह पढ़ा जाना चाहिए।

पुस्तक : हम हिंदुस्तानी : भारतीयता की वास्तविक पहचान
लेखक : सुधीर कक्कड़ और कैथरीना कक्कड़
अनुवाद : नरेन्द्र सैनी
प्रकाशक : पेंगुइन प्रकाशन
ND|
अवनीश मिश्रा
मूल्य : 225 रुपए


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