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रामकथा पर आधृत उपन्यास : अभ्युदय

सोमवार,अक्टूबर 16, 2017
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अचला बंसल के कहानी- संग्रह 'बहरहाल धन्यवाद' का लोकार्पण ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी द्वारा किया गया। ...
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पुस्तक समीक्षा : शब्द पखेरू

मंगलवार,अक्टूबर 10, 2017
ए तेवर, नई भाषा-शैली में लिखा नासिरा शर्मा का यह एक मार्मिक उपन्यास है, जो नई पीढ़ी के गहरे दुखों व जद्दोज़हद से हमारा ...
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बापू मर नहीं सकते। भारत ही नहीं दुनिया के तमाम देशों के विचारों में बापू यानी महात्मा गांधी का संदेश गूंज रहा है। गांधी ...
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साहित्य गंभीर होता है। शायद यही वजह है कि साहित्य के पाठक कम होते हैं। पत्रकारिता की शैली में पठनीयता होती है, क्योंकि ...
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नागार्जुन जीवन और कविता में बेहद बेलिहाज और निडर व्यक्तित्व वाले सर्जक रहे हैं। हिन्दी में तो वे संस्कृत पण्डितों और ...
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कोई भी सर्व सत्तावादी जिस चीज से सबसे ज्यादा डरता है वह है व्यंग्य। वह व्यंग्य को बर्दाश्त नहीं कर पाता यहां तक कि ...
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21 सितम्बर, गुरुवार शाम राजधानी स्थित ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में उज़ैर ई. रहमान की किताब ‘यादों के आईने में’ का लोकार्पण ...
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पिछले कई सालों से साइबर अपराधों को देखते सुलझाते ये बात सामने आई कि हिंदी में साइबर अपराध पर कोई ऐसी किताब नहीं है जो ...
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सुधा ओम ढींगरा की कहानियां इस दृष्टि से महत्वपूर्ण कहानियां होती हैं कि वे कहानियां एक साथ दो देशों, दो संस्कृतियों, दो ...
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नई सदी के प्रारंभ के चार-पांच वर्षों में हिन्दी कहानी एकदम से चेहरा बदल कर सामने आई। यह जो परिवर्तन दिखाई दिया, यह उन ...
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डॉ. राहत इंदौरी की नुमाइंदा शायरी के एक संकलन की ज़रूरत बहुत दिनों से अनुभव की जा रही थी। राहत की तीन उर्दू पुस्तकें और ...
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मूल्यों के अवमूल्यन, नैतिकता के क्षरण तथा संबंधों के हनन को दिनोदिन सशक्त करती तथाकथित आधुनिक जीवनशैली विसंगतियों और ...
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आज बादल बनकर बरस जाना है

रविवार,अगस्त 6, 2017
इस काव्य संग्रह की कविताएं जहाँ एक ओर प्रेरणा का स्त्रोत है, वही दूसरी ओर मन में छुपे नन्हे पौधो का उपवन भी है। हर रचना ...
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नरेन्द्रजी ने बहुत ही सरल भाषा में इन कविताओं की रचना की है, जो उनकी साहित्यिक परिपक्वता को परिलक्षित करती हैं। ...
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प्रभात प्रकाशन इन दिनों "देश विदेश की लोककथाएं" शीर्षक से विश्व की लोककथाओं का एक संकलन तैयार कर रहा है, जिसमें 600 से ...
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इस संग्रह में एक वरदान मांगा गया है कि जिंदगी का रमणीय सतरंगी बुलबुला व्यर्थ न हो, कि दरख्तों से झांकता रोशन सूर्य अस्त ...
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यह उपन्यास स्मृतियों की किस्सागोई है, जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएं और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते, ...
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अश्वत्थामा का अमरत्व वर्षों से अनेक मिथकों का हिस्सा रहा है। बचपन से ही हम अश्वत्थामा की अमरता की कहानियां सुनते आए ...
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प्रख्यात ओड़िया कथाकार गौरहरि दास की कहानियां पहली नजर में ही गांवों के यथार्थपरक चित्रों और यादगार चरित्रों से पाठक को ...
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