खंडित संवाद : जीवन संघर्ष की अभिव्यक्तियाँ

अखिल भारतीय समस्याओं को समेटती कहानियाँ

book review
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उपन्यास, कहानी, व्यंग्य, आदि विधाओं में तीन दर्जन से भी अधिक पुस्तकें लिख चुके से.रा. यात्री का यह नवीनतम कहानी संग्रह है। यात्री जी हिंदी के उन लेखकों में हैं जिनका अभिव्यक्ति विधान तो एकदम सीधा सरल होता है लेकिन उनकी रचनाएँ प्रभाव-क्षमता में अचूक होती हैं। 'खंडित संवाद' नामक यह कहानी संग्रह भी उनकी इस विशेषता का अपवाद नहीं है। इस संग्रह में कुल पचीस कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ इस जटिल समय में आम आदमी के जीवन संघर्ष और उसकी पीड़ा को बगैर किसी शैलीगत आडंबर के बिल्कुल सहज तरीके से हमारे सामने लाकर प्रस्तुत कर देती हैं।

से.रा.यात्री बगैर शोर किए हिंदी की एक प्रगतिशील आवाज हैं। इस संग्रह की अधिकांश कहानियों से इस बात की पुष्टि होती हैं। इन कहानियों के सारे पात्र वे साधारण मनुष्य हैं, जो इस व्यवस्था में किसी तरह जी भर रहे हैं और निरंतर अपने 'सरवाइवल' के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जीने के लिए संघर्ष कर रहे इन साधारण मनुष्यों की पीड़ा ही इन कहानियों का केंद्रीय विषय है। यही कारण है कि इन कहानियों के साथ पाठक गहरा जुड़ाव महसूस करने लगता है। उसे लगता है कि ये कहानियाँ खुद उसकी अपनी ही जीवन की कहानियाँ हैं। और यही से.रा. यात्री की सबसे बड़ी लेखकीय सफलता है।

इस संग्रह में शामिल कहानियों का भाव-बोध तो अलग-अलग हैं लेकिन परिवेश बहुत हद तक सीमित है। इन कहानियों का परिवेश मूलतः शहरी निम्न-मध्यवर्गीय जीवन और जीवन स्थितियों के इर्द-गिर्द बुना गया है। लेकिन इन कहानियों की खूबी यह है कि इसमें जिन समस्याओं को उठाया गया है, वे अखिल भारतीय हैं।

यही कारण है कि ये कहानियाँ एक खास परिवेश से संबंद्ध होते हुए भी उसका अतिक्रमण कर जाती हैं और देश की बहुसंख्यक आबादी से जुड़ जाती है। इस संग्रह की दो कहानियाँ 'रोजगार' और 'खुली आँखों का दुख' को बेरोजगारी पर लिखी गई महत्वपूर्ण कहानियों के रूप में चिन्हित कर सकते हैं। ये दोनों कहानियाँ हमारे समय की उस भयावह सच्चाई सामने लाती हैं जिसमें एक युवक की तमाम योग्यताओं और प्रतिभाओं के बावजूद एक अदद नौकरी नहीं मिल पाती।

'आत्मा की आवाज' एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो एक आमदनी वाले विभाग में अधिकारी रहने के बावजूद काफी ईमानदार रहा लेकिन अपने नौकरी के अंतिम वर्षों में पारिवारिक दबावों के कारण घर की आवश्यक जरूरतों की पूर्ति के लिए उसे मजबूरन कुछ गलत काम करने पड़े। इसका उसे घोर पश्चाताप हुआ। 'खंडित संवाद' इस संग्रह की सर्वाधिक महत्वपूर्ण कहानी है।

'देह से अलग' कहानी प्रेम पर लिखी गई अत्यंत सुंदर कहानी है जो इस भोगवादी समय में 'प्रेम' को देह तक सीमित कर देने वाली मानसिकता का जबर्दस्त प्रतिवाद करती है। गहरी संवेदना के कारण से.रा. यात्री की ये कहानियाँ मार्मिकता उत्पन्न करने में अत्यंत सफल हुई हैं। कहानियाँ बहुत जल्दी ही मन को छू लेती हैं।

कहानियाँ पढ़ने में खूब अच्छी लगती है लेकिन इन कहानियों में कोई बड़ा 'विजन' या विचार नहीं है। यही कारण है कि अच्छी होने के बावजूद ये हमारे समय के विमर्श में सार्थक हस्तक्षेप नहीं कर पाती, जितना ये कर सकती थीं। फिर भी इन कहानियों से प्रभावित हुए बिन नहीं ही रहा जा सकता।

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लेखक : से.रा. यात्री
प्रकाशक :
ND|
दिनेश कुमा
मूल्य : 170 रु.


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