स्वाद और सेहत से भरपूर गाजर

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गाजर का उपयोग हलवा, सलाद, अचार आदि बनाने में किया जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार गाजर स्वाद में मधुर, गुणों में तीक्ष्ण, कफ और रक्तपित्त को नष्ट करने वाली है। इसमें पीले रंग का कैरोटीन नामक तत्व विटामिन ए बनाता है। गाजर नेत्र ज्योति बढ़ाने वाली एक सर्वोत्तम जड़ है। इसके औषधीय गुण इस प्रकार हैं : -

*आग से त्वचा जल गई हो तो कच्ची गाजर को पीसकर लगाने से तुरंत लाभ होता है और जले हुए स्थान पर ठंडक पड़ जाती है।

*दिमाग को मजबूत बनाने के लिए गाजर का मुरब्बा प्रतिदिन सुबह लें।

*निम्न रक्तचाप के रोगियों को गाजर के रस में शहद मिलाकर लेना चाहिए। रक्तचाप सामान्य होने लगेगा।

*गाजर का रस, टमाटर का रस, संतरे का रस और चुकंदर का रस लगभग पच्चीस ग्राम की मात्रा में रोजाना दो माह तक लेने से चेहरे के मुँहासे, दाग, झाइयाँ आदि मिट जाते हैं।

*पथरी की शिकायत में गाजर, चकुंदर और ककड़ी का रस समान मात्रा में लें।

*गाजर पीसकर आग पर सेंककर इसकी पुल्टिस बनाकर बाँधने से फोड़े ठीक हो जाते हैं।

*गाजर का अचार तिल्ली रोग को नष्ट करता है।

*अनिद्रा रोग में प्रतिदिन सुबह-शाम एक कप गाजर का रस लें।

*गाजर का सेवन उदर रोग, पित्त, कफ एवं कब्ज का नाश करता है। यह आँतों में जमा मल को तीव्रता से साफ करती है।

*गाजर को उबालकर रस निकाल लें। इसे ठंडा करके 1 कप रस में 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से सीने में उठने वाला दर्द मिट जाता है।

*बच्चों को कच्ची गाजर खिलाने से पेट के कीड़े निकल जाते हैं।

*गाजर का नित्य सेवन रक्त की कमी को दूर कर रक्त में लौह तत्वों की मात्रा को बढ़ाता है।

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प्रस्तुति : रजनी गुलाटी


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