वेबदुनिया : ऑनलाइन पत्रकारिता के 17 वर्ष

Last Updated: शुक्रवार, 23 सितम्बर 2016 (21:01 IST)
यूं तो वेबदुनिया को दुनिया का पहला हिन्दी पोर्टल होने का गौरव हासिल है, लेकिन इसके जन्म की कहानी कम रोचक नहीं है। छोटे से एक कमरे से शुरू हुआ यह वेब पोर्टल अब वटवृक्ष का रूप धारण कर चुका है। जिस समय इंटरनेट के क्षेत्र में भाषाई पोर्टल्स के लिए संभावनाएं न के बराबर थीं, उस समय 23 सितंबर 1999 को इसकी शुरुआत हुई। इसको लेकर काम की शुरुआत तो 1998 से ही हो गई थी। सबसे पहले बहुभाषी ई-मेल सेवा ई-पत्र पर काम हुआ था। 
 
भारत में इंटरनेट की शुरुआत 80 के दशक से ही हुई, लेकिन विधिवत रूप से 15 अगस्त 1995 में भारत संचार निगम लिमिटेड ने गेटवे सर्विस लांच कर इसकी शुरुआत की। तब सिर्फ अंग्रेजी की वेबसाइटें होती थीं और सारा काम अंग्रेजी में ही होता था। भारत में इंटरनेट की शुरुआत के महज 3 साल बाद हिन्दी का पहला पोर्टल वेबदुनिया डॉट कॉम लांच हुआ। इसे हिन्दी भाषा के लिए नई क्रांति की शुरुआत माना गया।
वेबदुनिया की जिस समय शुरुआत हुई, उसके संघर्ष की पटकथा भी उसी समय तैयार हो गई थी, क्योंकि जिस देश में ज्यादातर भाषाई समाचार-पत्रों की स्थिति बहुत अच्छी न हो ऐसे में वेब पोर्टल की शुरुआत निश्चित ही एक साहसिक काम था। दूसरे अर्थों में कहें तो यह दुस्साहस था। 
मगर समय के साथ परिस्थितियां भी बदलीं, वेबदुनिया की मेहनत रंग लाई और पाठकों का कारवां बढ़ता ही गया। और ये यात्रा पूरे आत्मविश्वास के साथ जारी है। आज देश ही नहीं, पूरी दुनिया में वेबदुनिया की पहचान है। विदेशों में बसे हिन्दीभाषी भारतीयों की तो खास पसंद बन गया है यह पोर्टल। अगर यह कहें कि किसी व्रत-त्योहार की जानकारी हासिल करने के लिए तो वेबदुनिया उनकी जरूरत बन गया है, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यदि वेब मीडिया की वर्तमान स्थिति को देखें तो कह सकते हैं कि वेबदुनिया के सीईओ श्री विनय छजलानी का यह काफी दूरदर्शिताभरा कदम था।
 
वेबदुनिया इसलिए भी खास है, क्योंकि जिस जमाने में अखबारों को तोप और तलवारों से ज्यादा ताकतवर और धारदार माना जाता था, ऐसे समय में लोगों को खबर पढ़ने के लिए उनके हाथ में कम्प्यूटर का माउस थमाना वाकई बड़ी बात थी। वेबदुनिया की यही खूबियां उसे औरों से अलग भी करती हैं और आज इस वेब पोर्टल की देश के प्रमुख हिन्दी पोर्टल्स में गिनती होती है।
 
वेबदुनिया ने जब अपने नन्हे कदम इंटरनेट के मंच पर रखे थे, तब आम लोगों के लिए इंटरनेट अंतरिक्ष में चलने वाली कोई वस्तु थी जिसके बारे में जानना अंग्रेजी भाषा में दक्ष लोगों का काम ही हुआ करता था, लेकिन भारत में आज इंटरनेट जन-जन की जरूरत बनता जा रहा है। अब लोगों के लिए इंटरनेट कोई अंतरिक्ष उपग्रह नहीं है बल्कि हाथ में रखा एक जादुई उपकरण मात्र है, जिसके माध्यम से अब वह अपने शहर नहीं, अमेरिका के शहरों से भी जुड़ गया है।
 
इंटरनेट के प्रारंभिक काल में इंटरनेट के संदर्भ में कई भ्रांतियां थीं। इसे पूरी तरह से अंग्रेजी भाषा का माध्यम माना जाता था। वास्तव में हिन्दी में पोर्टल की शुरुआत यह सोचकर की गई कि इंटरनेट जनसंचार का अत्यंत सुगम माध्यम बनता जा रहा है और देश में इसकी पहुंच जन-जन तक बनाने के लिए हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं का सहयोग महत्वपूर्ण साबित होगा। > वेबदुनिया को न सिर्फ पहला हिन्दी पोर्टल होने का गौरव प्राप्त है, बल्कि चार दक्षिण भारतीय भाषाओं समेत आठ भाषाओं में सफलतापूर्वक पोर्टल संचालित हो रहे हैं। ये पोर्टल्स भारत में ही नहीं, विदेशों में भी अत्यंत लोकप्रिय हैं। वेबदुनिया ने पहली बहुभाषी ब्लॉगिंग साइट माय वेबदुनिया, गेम्स, क्लासीफाइड से लेकर इंटरनेट पर अन्य कई प्रयोग किए।

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