पुरुष मन में रिसता नारी का सम्मान

स्मृति आदित्य|
सृष्टि के आरंभ से ही नारी, रचयिता ब्रह्मा से लेकर देवताओं तक, पौराणिक पात्रों से लेकर राजा-महाराजाओं की सल्तनत तक के लिए कौतुक और विस्मय का विषय रहीं है। नारी, युगों-युगों से जिसे सिर्फ और सिर्फ उसकी देह से पहचाना जाता है। सदियों से उसकी प्रखरता, बौद्धिकता, सुघड़ता और कुशलता को परे रख उसके रंग, रूप, यौवन, आकार, उभार और ऊंचाई के आधार पर परखा गया है। 

 
वही नारी फिर खड़ी है एक और दिवस के मुहाने पर। एक और दिन की दहलीज पर। नारी, महिला, औरत, स्त्री, वामा, खवातीन जैसे खुद को संबोधित किए जाने वाले आकर्षक लफ्जों को अपनी हथेलियों में पकड़े वह आज भी इनके अर्थ तलाश रही है। 
 
नारी अस्तित्व के असंख्य प्रश्न, महिला आंदोलनों और जागरूकता के बाद भी उतने ही गंभीर और चिंताजनक हैं जितने सदियों पहले थे। उन प्रश्नों के चेहरे बदल गए हैं, परिधान बदल गए हैं लेकिन प्रश्नों का मूल स्वरूप आज भी यथावत है। आखिर कहां से आएगा नारी से संबंधित समस्याओं का समुचित समाधान। 
 
ना बलात्कार कम हुए हैं ना अत्याचार, ना हत्याएं बंद हुई हैं ना हिंसा। अपहरण हो या आत्महत्या, भारतीय औरत से जुड़े आंकड़ें लगातार बढ़ रहे हैं और प्रशासनिक शिथिलताएं अपनी बेबसी पर शर्मा भी नहीं पा रही है। 
 
सकारात्मक सोचने की सारी हदें पार कर लें तब भी समाज में व्याप्त नकारात्मकताएं कहीं ना कहीं से आकर घेर ही लेती है। उपलब्धियों पर मुस्कुराने की तमाम कोशिशों पर भारी पड़ती है एक मासूम और मार्मिक चीख। 
 
वह चीख, जो उसकी देह के छले जाने पर आसमान को चीरने की ताकत रखती है लेकिन उन तक नहीं पहुंच पाती जो उसके सम्मान और सुरक्षा के लिए वास्तव में जिम्मेदार है। वह चीख, जो कदम-कदम पर होती सामाजिक बेशर्मी पर उसके ही मन में घुट कर रह जाती है। दिन-प्रति-दिन चीखते प्रश्नों की भीड़ बढ़ती जा रही है और उत्तरों के गंतव्य सदियों से लापता है। 
 
कभी-कभी लगता है महिलाओं के प्रति बढ़ती विकृतियों का कारण पुरुष से कहीं अधिक वह सामाजिक सोच है जो जन्म से लेकर मृत्यु तक स्त्री-पुरुष को अलग-अलग नियमों के खाकों में जकड़ देती है। पुरुष कभी देख-सुन ही नहीं पाता कि स्त्री के भीतर कितना और कैसा-कैसा दर्द रिसता है। भावनात्मक वेदना तो दूर की बात है मनुष्यता के नाते भी स्त्री के प्रति जो गहरी संवेदनशीलता पुरुष मन में उपजनी चाहिए वह नहीं उपज पाती। 
 
एक चिकित्सक, चाहे वह महिला हो या पुरुष जानते हैं कि प्रसव पीड़ा कितनी सघन होती है। उसे देखने-महसूसने के बाद शायद ही कभी वे अपनी मां का मन दुखा सके होंगे। कहने को यह बड़ा मामूली उदाहरण हो सकता है मगर आत्मिक स्तर पर स्त्री-सम्मान को अनुभूत करने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता ‍कि जन्मदायिनी एक जीव को पृथ्वी पर लाने से पहले दर्द की किस इंतहा से गुजरती है। 
 
हर पुरुष इतना निर्दयी और नासमझ नहीं होता है कि दर्द और प्रताड़ना के फर्क को पहचान ना सके। जरूरत इस बात की अधिक है कि बलात्कार या इस तरह के दूसरे अनाचारों के पीछे के मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारणों को तलाशा जाए और उनका उपचार किया जाए। 
 
पुरुष मन भी भीगता है, पुरुष भी पसीजता है, पुरुष भी पिघलता है बस उसके मन के किसी कोने में स्त्री-सम्मान का एक तार झनझनाने की देर है, औरत के आदर के प्रति पुरुष बस इतना ही तो दूर है.. पर कोशिश की जाए कि अवांछनीय शारीरिक दूरी बढ़े इसलिए यह 'दूरी' कम हो।

वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।

और भी पढ़ें :

लिपबाम के फायदे जानते हैं और इसे लगाते हैं, तो इसके नुकसान ...

लिपबाम के फायदे जानते हैं और इसे लगाते हैं, तो इसके नुकसान भी जरूर जान लें
लिप बाम सौंदर्य प्रसाधन में आज एक ऐसा प्रोडक्ट बन चुका है, जिसके बिना किसी लड़की व महिला ...

पति यदि दिखाए थोड़ी सी समझदारी तो पत्नी भूल जाएगी नाराज होना

पति यदि दिखाए थोड़ी सी समझदारी तो पत्नी भूल जाएगी नाराज होना
पति-पत्नी के बीच घर के दैनिक कार्य को लेकर, नोकझोंक का सामना रोजाना होता हैं। पति का ...

क्या आपको भी होती है एसिडिटी, जानिए प्रमुख कारण और बचाव

क्या आपको भी होती है एसिडिटी, जानिए प्रमुख कारण और बचाव
मिर्च-मसाले वाले पदार्थ अधिक सेवन करने से एसिडिटी होती है। इसके अतिरिक्त कई कारण हैं ...

फलाहार का विशेष व्यंजन है चटपटा साबूदाना बड़ा

फलाहार का विशेष व्यंजन है चटपटा साबूदाना बड़ा
सबसे पहले साबूदाने को 2-3 बार धोकर पानी में 1-2 घंटे के लिए भिगो कर रख दें।

बालों को कलर करते हैं, तो पहले यह सही तरीका जरूर जान लें

बालों को कलर करते हैं, तो पहले यह सही तरीका जरूर जान लें
हर बार आप सैलून में ही जाकर अपने बालों को कलर करवाएं, यह संभव नहीं है। बेशक कई लोग हमेशा ...

6 बहुत जरूरी सवाल जो हर महिला को अपनी गायनोकोलॉजिस्ट से ...

6 बहुत जरूरी सवाल जो हर महिला को अपनी गायनोकोलॉजिस्ट से पूछना चाहिए
क्या आप उन लोगों में से हैं जिन्होंने कभी एक लेडी डॉक्टर से मिलने की जरूरत नहीं समझी? आप ...

3 स्वर, 3 नाड़ियां... जीवन और सेह‍त दोनों को बनाते हैं शुभ, ...

3 स्वर, 3 नाड़ियां... जीवन और सेह‍त दोनों को बनाते हैं शुभ, जानिए क्या है स्वरोदय विज्ञान
स्वर विज्ञान को जानने वाला कभी भी विपरीत परिस्थितियों में नहीं फंसता और फंस भी जाए तो ...

घर में रोशनी कम रहती है तो यह हो सकता है खतरनाक, पढ़ें रोशनी ...

घर में रोशनी कम रहती है तो यह हो सकता है खतरनाक, पढ़ें रोशनी बढ़ाने के 5 टिप्स
घर या कमरे में कम रोशनी न केवल घर की सजावट को कम करती है बल्कि रहने वाले सदस्यों की सेहत ...

ताजी-हरी-चमकती सब्जियां यानी खतरे की घंटियां, जानिए कौन कर ...

ताजी-हरी-चमकती सब्जियां यानी खतरे की घंटियां, जानिए कौन कर रहा है आपकी सेहत से खिलवाड़
हर चीज में मिलावट हो रही है, फिर चाहे वह मसाले, सब्जी या फिर ताकत प्रदान करने वाले फल सभी ...

बदल डालें घर का इंटीरियर और नए घर में रहने जैसा अहसास ...

बदल डालें घर का इंटीरियर और नए घर में रहने जैसा अहसास पाएं...
घर में सारा सामान सुव्यवस्थित जमा हुआ है फिर भी कुछ कमी लगती है? किसी नएपन के अहसास की ...