साधारण महिलाओं की उपलब्धियों के जगमगाते तारे

ND
कहीं घूँघट में छिपकर दबे-सहमे कदमों को पुरुष के साथ मिलाते हुए, तो कहीं रूढ़ियों से लड़ते हुए भारतीय नारी ने सदियों के संघर्षों की आग में तपाकर अपने आपको सोना बनाया है। यह क्रम आज भी जारी है। उसने घर की देहली का सम्मान करते हुए अपने आपको साबित किया। घरेलू जिम्मेदारियों को साथ लिए बाहर के संघर्षों से भी लगातार जूझती रही। आज गाँव से लेकर महानगर तक उसकी सफलता की रोशनी से जगमगा रहे हैं

नारी को हम अलग-अलग रूपों में देखते हैं। दुनिया की आधी आबादी महिलाएँ आज टेक्नो फ्रेंड, श्रेष्ठ कॉर्पोरेट, श्रेष्ठ वैज्ञानिक, राष्ट्रपति, श्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, श्रेष्ठ पत्रकार व अनेक ऐसे पदों पर मिलेंगी, जो पहले उनके लिए अछूते माने जाते थे। ये उदाहरण तो उन महिलाओं के हैं जिन्हें बढ़ने के अवसर मिले। आज हम बात करेंगे उन साधारण महिलाओं की जिनके पास सीमित साधन व ढेर सारी बाधाएँ थीं, लेकिन जिजीविषा के साथ उन्होंने स्वयं को समाज में साबित किया। इन महिलाओं ने उस नदी की तरह अपना मार्ग बनाया जिसकी राह में बड़ी चट्टानें आ जाती हैं, वे उसको काट तो नहीं सकतीं लेकिन नया रास्ता बनाकर सुंदर झरने का रूप लेती हैं।

कमरुनिसा
कमरुनिसा का विवाह पुराने विचार के सजातीय परिवार में हुआ। कम उम्र में विवाह होने पर उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। मन में पढ़ाई की ललक थी, लेकिन परिवार की नई जिम्मेदारियों को संभालना भी था। 3 बच्चों के बाद संयुक्त परिवारमें पति से पढ़ने की इच्छा जाहिर की, लेकिन परिवार से अनुमति न मिली। आखिरकार उनके मन में पढ़ाई की ललक देख पति का मन पसीजा व उन्होंने मेट्रिक के बाद की पढ़ाई शुरू की। शुरू में परिवार में इसका बहुत विरोध हुआ। लेकिन सबके तानों व संघर्षों के बावजूद कमरुनिसा ने स्नातक किया फिर लॉ के बाद सिविल जज की परीक्षा पास कर प्रशासनिक अधिकारी का पद पाया। परिवार, समाज की परवाह न करते हुए उन्होंने सबको अपने काम से चकित कर दिया।

शीला
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- डॉ. मनीषा वत्
40 वर्ष की उम्र में एक दिन अचानक पति का व्यवसाय बंद हो गया। शीला के सामने अँधेरा ही अँधेरा था। व्यवसाय बंद होने के आघात से पति भी दिल के मरीज हो गए, लेकिन शीला ने हिम्मत नहीं हारी। ज्यादा पढ़ी-लिखी न होने के कारण वे कोई अच्छीनौकरी तो नहीं कर सकती थीं, लेकिन खाना, अचार, पापड़ आदि बहुत अच्छा बनाती थीं। उन्होंने अचार, पापड़, मिठाई, नमकीन बनाने शुरू किए व त्योहारों व छोटी पार्टी में उनकी माँग होने लगी। आज वे मेहनत से अपना घर चला रही हैं।

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