मन की पुकार है हिन्दी में बात करें

हिन्दी पर विद्वानों के विचार

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मन की पुकार है हिन्दी में बात करें, पर जमाना है कि अंग्रेजी की रट लगाए! बस अंग्रेजी बोलो, चाहे जैसी बोलो, क्योंकि जमाना है अंग्रेजी का। अपनी मातृभाषा के भले भविष्य की बात करना सही मायने में स्वयं को आइने में देखना और आत्ममुग्ध होने जैसी बात है। हिन्दी हमें सदियों से अच्छी लगती आ रही है, पर अच्छे लगने और उसे प्रयोग में लाने में काफी अंतर आ गया!

हिन्दी फिल्मी सितारों से लेकर राजनेता भी हिन्दी की वकालत करते हैं, पर बात नहीं करते! अनमने ढंग से ही सही पर मुद्दे की बात यह है कि हमारा दिल चाहता है हिन्दी में पढ़ें, आगे बढ़ें , पर माहौल इसके विपरीत बनता जा रहा है। प्रस्तुत है हिन्दी की वकालत करने वाले देश के उन नामचीन लोगों के विचार, जिनके प्रयासों से आज तक हिन्दी बची है और आगे भी बची रहेगी।

अगले पेज पर पढ़ें लेखक अजित कुमार के विचार

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