वेलेंटाइन डे स्पेशल गज़ल : सच्चे प्यार के सिक्के...


- फखरी सैफी




उनके चेहरे पर शर्म के गुलाब खिल जाए
मुझे मेरे सवालों के जवाब मिल जाए।
मेरी जिंदगी खुशबुओं से
महक जाए
काश वोह मेरी गलियों से एकबार निकल जाए।
जहां उनकी तिकड़मे-चालबाजियां नहीं चली..
शायद वहां मेरे सच्चे प्यार के सिक्के चल जाए..
दिल के मामलों में कोशिशे अकसर नाकामयाब होती है
देखिये कोशिश तो हमने भी बहुत की थी कि तुम्हें भुल जाए
मेरा हाथ थाम लो गले से लगा लो
बहके कदम मेरे शायद फिर संभल जाए।
हो गई है ज़हरीली फिज़ा और चमन उजाड़
कोई मसीहा आए और ये हालात बदल जाए।

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