जन्नत पुकारती है...

FILE

एक बार फिर से मिट्टी की सूरत करो मुझे
इज्जत के साथ दुनिया से रुख्सत करो मुझे

जन्नत पुकारती है कि मैं हूं तेरे लिए
दुनिया गले पड़ी है कि जन्नत करो मुझे

हमारी बेरुखी की देन है बाजार की जीनत
अगर हम में वफा होती तो ये कोठा नहीं होता

न दिल राजी न वह राजी तो काहे की इबादत है
किए जाता हूं मैं सज्दा मगर सज्दा नहीं होता

फकीरों की ये बस्ती है फरावानी नहीं होगी
मगर जब तक रहोगे हां परेशानी नहीं होगी

WD|
- मुनव्वर राना
(फरावानी-समृद्धि, आसानी से उपलब्ध होना)

Widgets Magazine
वेबदुनिया हिंदी मोबाइल ऐप अब iOS पर भी, डाउनलोड के लिए क्लिक करें। एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें। ख़बरें पढ़ने और राय देने के लिए हमारे फेसबुक पन्ने और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं।



और भी पढ़ें :