मीना कुमारी ने लिखी थी यह 5 गजलें ...

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तन्हा है आसमां तन्हा...
 
चांद तनहा है आसमां तन्हा
दिल मिला है कहां-कहां तनहा
 
बुझ गई आस, छुप गया तारा
थरथराता रहा धुआं तन्हा  
जिंदगी क्या इसी को कहते हैं
जिस्म तन्हा है और जां तन्हा
 
हमसफर कोई गर मिले भी कहीं
दोनों चलते रहे यहां तन्हा
 
जलती-बुझती-सी रौशनी के परे
सिमटा-सिमटा सा इक मकां तन्हा
 
राह देखा करेगा सदियों तक 
छोड़ जाएंगे यह जहां तन्हा...
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता....अगले पेज पर

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