कहां-कहां मोर्चा खोल रखा है इस्लामिक आतंकवादियों ने?

Last Updated: बुधवार, 7 दिसंबर 2016 (12:18 IST)
यूरोप में फैल रहा आतंक : फ्रांस की कार्टून वाली घटना ने यूरोप और इस्लाम के बीच चले आ रहे संघर्ष की कहानी को एक बार फिर से ताजा कर दिया। एक बार फिर यूरोप इस्लामिक आतंकवादियों के निशाने पर है। सद्दाम हुसैन, गद्दाफी, ओसामा बिन लादेन को मारने वाले अमेरिकी और यूरोपीय लोग अब यह सोचने लगे हैं कि यूरोप में रह रहे मुस्लिमों से कैसे निपटा जाए। अभी उनकी सबसे बड़ी चिंता इस्लाम के अनुयायियों की बढ़ती हुई जनसंख्या है।
2012 के आंकड़ों के अनुसार विश्व में ईसाइयों की संख्या 2 अरब 20 करोड़ है यानी विश्व की आबादी का 31.5 प्रतिशत, जबकि इस्लाम को मानने वालों की संख्या 1 अरब 80 करोड़ है यानी 25.2 प्रतिशत। लेकिन इस्लाम के अनुयायियों की वृद्धि-दर विश्व की जनसंख्या में वृद्धि-दर से दुगुनी है और यूरोपीय शोधकर्ताओं के अनुसार यह दिशा बनी रही तो 2050 तक दुनिया में ईसाई मतावलंबियों की तुलना में इस्लाम को मानने वाले 1 प्रतिशत अधिक होंगे। अमेरिका और यूरोप में अभी उनकी संख्या अधिक नहीं है, पर तेजी से बढ़ रही है और 2030 तक दुगनी हो जाएगी। 1900 में वे विश्व की जनसंख्या का 12.50 प्रतिशत थे और आज 25 प्रतिशत से अधिक हैं। 
 
अब धीरे-धीरे गैर-मुस्लिम बहुल क्षे‍त्र यूरोप में भी आतंकवाद फैलने लगा है। फ्रांस, जर्मन, ब्रिटेन और स्पेन के मुस्लिम बहुल क्षेत्र के युवा आतंकवाद की ओर आकर्षित होकर अपने ही देश के खिलाफ में शामिल होने लगे हैं। दूसरी ओर यूरोप के जिन देशों ने जिन मुसलमानों को शरण दे रखी थी उन्हीं झुंड में से भी अब आतंकवादी निकलने लगे हैं।
 
इस वर्ष फ्रांस में एक गिरजाघर में हुए आतंकवादी हमले से यूरोप के लाखों लोगों में आतंकवाद के खतरे का डर समा गया है। इसके बाद पेरिस और फिर नीस में हुए हमले से यह पुष्टि हो गई कि फ्रांस के ही मुस्लिमों के सहयोग से इन हमलों को अंजाम दिया गया। फ्रांस, नीस शहर में 14 जुलाई के हमले के बाद से ही हाई अलर्ट पर है, जब एक व्यक्ति ने बास्तील डे के उत्सव के लिए जुटी भीड़ को एक ट्रक से रौंद दिया था। इस घटना में 84 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से भी अधिक घायल हो गए थे।
 
ब्रिटेन के विश्लेषक डेविड गार्नर का मानना है कि सऊदी अरब दुनिया में न केवल सबसे बड़ा तेल निर्यातक है बल्कि आतंकवाद और वहाबी विचारधारा का सबसे बड़ा स्रोत भी है। इस विश्लेषक के अनुसार सऊदी अरब ने 1990 की दहाई में शीतयुद्ध की समाप्ति के साथ ही यूरोप में मस्जिदों के निर्माण और उनको आधुनिक करने का कार्य आरंभ किया और यूरोप के अधिकतर देशों जैसे अल्बानी, कोसोवो, बोस्निया, मैसिडोनिया और बुल्गारिया के कुछ हिस्सों में वहाबी विचारधारा को फैलाने के लिए मस्जिदों का निर्माण किया।
 
पिछले साल ब्रिटेन में 299 संदिग्ध आतंकवादियों को हिरासत में लिया गया था, जो इसके भी पिछले वर्ष की इस अवधि की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा थे। ब्रिटेन के अधिकारियों ने सितंबर 2001 से आतंकवाद से जुड़े आंकड़े इकट्ठा करना शुरू किया था जिसके बाद से यह सर्वाधिक संख्या है। 
 
इससे पहले सर्वाधिक गिरफ्तारियां 2005 में हुई थीं, जब 284 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि जिन लोगों को गिरफ्तार किया गया उनमें कई लोग ऐसे थे, जो खुद को या तो ब्रिटिश नागरिक या ब्रिटेन की दोहरी नागरिकता वाला मानते थे।
 
ब्रिटेन में सुरक्षा एजेंसियों को लंदन में एकसाथ 10 आतंकवादी हमले होने की आशंका के मद्देनजर अलर्ट किया गया, क्योंकि उन्हें इस बात का डर है कि सीरिया से लौट रहे आतंकवादी यहां पेरिस जैसा हमला दोहरा सकते हैं।
 
फ्रांस और जर्मनी ही नहीं, ब्रिटेन में भी बाहरी देशों से आकर बसने वालों, जिसमें मुस्लिम आबादी अधिक है, को शक की नजरों से देखा जाता है। यूरोप में सबसे ज्यादा मुसलमान फ्रांस में रहते हैं, जो करीब 50 लाख या आबादी का 7.50 फीसदी हैं। जर्मनी में मुसलमानों की संख्या 40 लाख या 5 फीसदी जबकि ब्रिटेन में 30 लाख या 5 फीसदी है। तीनों जगह मुख्य राजनीतिक दलों को आप्रवासियों की बढ़ती संख्या के मसले पर लोगों के ग़ुस्से और असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि लंदन के 7/7 हमले ने भी ब्रिटेन को आगाह कर दिया था कि वह चरमपंथी हिंसा का शिकार हो सकता है।
 
इस्लाम विरोधी आंदोलन 'पेगिडा' : यही सभी देखते हुए इस्लाम विरोधी आंदोलन 'पेगिडा' शुरू हुआ। पश्चिम के इस्लामीकरण के खिलाफ यूरोप के राष्ट्रवादी यानी 'पेगिडा' के समर्थक मानते हैं कि इस्लामीकरण से ईसाई धर्म की संस्कृति और परंपराओं को खतरा है। इसमें कोई मतभिन्नता नहीं कि इस्लाम जहां-जहां होगा, वहां आतंक भी होगा। यही कारण है कि अब सीरिया और इराक से भागे लाखों शरणार्थियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। (एजेंसियां)

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