हॉकी के सच्चे दूत रहे 'सरदार' : राजिन्दर सिंह

Last Updated: शनिवार, 15 सितम्बर 2018 (01:17 IST)
नई दिल्ली। की खेल के प्रति प्रतिबद्धता और योगदान की प्रशंसा करते हुए हॉकी इंडिया (एचआई) ने उन्हें खेल का सच्चा दूत बताया है।

32 साल के सरदार ने हाल ही में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किए जाने के बाद अपने 12 वर्ष के लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगा दिया था। देश की राष्ट्रीय हॉकी संस्था ने सरदार के खेल में योगदान को सराहते हुए उन्हें भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं दी हैं।

एचआई के अध्यक्ष ने सरदार को हॉकी का एम्बेसेडर बताते हुए कहा कि हॉकी के अच्छे और खराब दौर सभी में सरदार ने अपनी दृढ़ता और प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने बतौर कप्तान और अपने प्रदर्शन से भी युवाओं को प्रेरित किया है। उन्होंने 2014 के एशियाई खेलों में टीम को उसकी सबसे बड़ी जीत दिलाई थी और उनके नेतृत्व में टीम ने विश्व रैंकिंग में भी नई ऊंचाइयां देखीं।
उन्होंने कहा कि हॉकी इंडिया सरदार के योगदान को हमेशा याद रखेगी और उन्हें भविष्य के लिए अपनी शुभकामनाएं देती है। सरदार ने बुधवार को एचआई को आधिकारिक पत्र भेजकर हॉकी से संन्यास ले लिया था और गुरुवार को चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन में इसकी घोषणा कर दी।

सरदार वर्ष 2010 और 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे जबकि वर्ष 2007 और 2017 के एशिया कप में स्वर्ण विजेता रही टीम में शामिल रहे। वे 2013 के एशियाई खेलों की रजत, 2014 खेलों के स्वर्ण विजेता टीम का हिस्सा रहे तथा वर्ष 2015 में रायपुर में वर्ल्ड लीग फाइनल में कांस्य पदक जीतने वाली टीम में भी प्रतिनिधित्व किया।
वे 2011 चैंपियंस चैलेंज की रजत विजेता टीम में शामिल रहे जबकि वर्ष 2018 में ब्रेदा में हुए एफआईएच चैंपियंस ट्रॉफी में भारत के रजत पदक में भी अहम भूमिका निभाई। इसके अलावा गत माह संपन्न हुए एशियाई खेलों में कांस्य विजेता रही भारतीय टीम में भी खेले। (वार्ता)


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