सीमा तोमर को पदक जीतने का भरोसा

नई दिल्ली| भाषा|
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को विश्व कप शॉटगन ट्रैप स्पर्धा में पदक दिलाकर इतिहास रचने वाली इटली में कड़ी ट्रेनिंग के बाद म्यूनिख में चल रही विश्व चैम्पियनशिप में अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन उन्हें पूरा भरोसा है कि वह अक्टूबर में यहाँ होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जरूर हासिल करेंगी।

सीमा ने मई में इंग्लैंड के डोरसेट में हुए आईएसएसएफ विश्व कप में शॉटगन ट्रैप स्पर्धा में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया था क्योंकि वह विश्व कप शॉटगन में पदक जीतने वाली पहली भारतीय निशानेबाज थी।

इटली में भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा आयोजित ट्रेनिंग के बाद वह म्यूनिख में विश्व चैम्पियनशिप में भाग लेने रवाना हो गई, लेकिन बीमार होने के कारण अपना राउंड पूरा नहीं कर सकी, लेकिन वह इससे बिलकुल भी निराश नहीं है।
सीमा ने ई-मेल इंटरव्यू में कहा कि‍ मेरी ट्रेनिंग काफी अच्छी चल रही है जो सुबह साढ़े आठ से शुरू होकर डेढ़ बजे तक चलती है। मैं काफी मेहनत कर रही हूँ।

सांसद राहुल गाँधी द्वारा भेंट में मिली पिस्टल से अपने निशानेबाजी करियर की शुरुआत करने वाली सीमा को तैयारियों में वरिष्ठ निशानेबाज अनवर सुल्तान से काफी मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि मुझे अपनी तैयारियों में मेरे सीनियर निशानेबाज अनवर सुल्तान से तकनीकी रूप से और मानसिक रूप से काफी मदद मिलती है।
उत्तर प्रदेश के बागपत के छोटे से गाँव से आने वाली सीमा ने अपने करियर के बारे में बताया कि शुरू में मैंने राहुल गाँधी द्वारा हमारी शूटिंग रेंज को भेंट में दी गई पिस्टल से ही निशानेबाजी की शुरुआत की, लेकिन अब मैं ट्रैप में भाग लेती हूँ तो शॉटगन इस्तेमाल करती हूँ।

राहुल गाँधी से मिलने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि मैं अभी तक उनसे मिल नहीं सकी हूँ, लेकिन कुछ शानदार उपलब्धियाँ हासिल कर एक दिन उनसे जरूर मिलना चाहती हूँ। इस 27 वर्षीय निशानेबाज ने कहा कि मैं पाँच अगस्त को भारत लौटूँगी और अपने लिए नया कार्यक्रम तैयार करूँगी।
वर्ष 2004 में एयर राइफल में शानदार स्कोर की बदौलत ही इनफैंट्री स्कूल (कोर्प्स ऑफ सिग्नल्स) में डिवीजन क्लर्क नियुक्त हो गई, लेकिन बड़ी बंदूकों से उनका लगाव गया नहीं।

वह मानती हैं कि सेना के सहयोग के बिना वह शॉटगन में इस मुकाम तक नहीं पहुँच पाती क्योंकि यह काफी महँगा होता है। राष्ट्रीय चैम्पियनशिप और जयपुर, कजाखस्तान के अलमांटी और बैंकाक में एशियाई क्ले स्पर्धा में पदक जीत चुकी इस निशानेबाज ने कहा कि मुझे अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मेरी माँ (प्राक्षी) से मिलती है जो खुद राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज रह चुकी हैं।
भारत मेलबोर्न 2006 राष्ट्रमंडल खेलों में चौथे स्थान पर रहा था, जिसमें निशानेबाजी और भारोत्तोलन ने सबसे ज्यादा पदक दिलाए थे। भारत मेलबोर्न में निशानेबाजी में 16 स्वर्ण समेत 26 पदकों से शीर्ष पर रहा था।


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