Sun, 5 Jul 2026

Notifications

  1. धर्म-संसार
  2. धर्म-दर्शन
  3. श्रावण मास विशेष
  4. Shiv Mahapuran

क्या कहती है शिव महापुराण की वायु संहिता (पूर्व और उत्तर भाग)

शिव महापुराण
इस संहिता के दो भाग हैं। पूर्व और उत्तर। इन दोनों भागों में पाशुपत विज्ञान, मोक्ष के लिए शिव ज्ञान की प्रधानता, हवन, योग और शिव-ध्यान का महत्व समझाया गया है। शिव ही चराचर जगत् के एकमात्र देवता हैं।

शिव के 'निर्गुण' और 'सगुण' रूप का विवेचन करते हुए कहा गया है कि शिव एक ही हैं, जो समस्त प्राणियों पर दया करते हैं। इस कार्य के लिए ही वे सगुण रूप धारण करते हैं।

जिस प्रकार 'अग्नि तत्व' और 'जल तत्व' को किसी रूप विशेष में रखकर लाया जाता है, उसी प्रकार शिव अपना कल्याणकारी स्वरूप साकार मूर्ति के रूप में प्रकट करके पीड़ित व्यक्ति के सम्मुख आते हैं शिव की महिमा का गान ही इस पुराण का प्रमुख विषय है।
यह अवश्य पढ़ें 
 
ये भी पढ़ें
जब भगवान ने बनाई स्त्री....पढ़ें यह दिलचस्प रचना