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क्या प्रारब्ध की धारणा से व्यक्ति अकर्मण्य बनता है?

सोमवार,जुलाई 16, 2018
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खाना बनाना भी एक कला है। हालांकि जो मिले, वही खा लें, इसी में भलाई है। खाने के प्रति लालसा नहीं रखनी चाहिए, लेकिन खाने ...
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व्रत, भक्ति और शुभ कर्म के चार महीने को हिन्दू धर्म में 'चातुर्मास' कहा गया है। ध्यान और साधना करने वाले लोगों के लिए ...
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मंदिर' का अर्थ होता है- मन से दूर कोई स्थान। 'मंदिर' का शाब्दिक अर्थ घर भी होता है। देवालय, शिवालय, रामद्वारा, ...
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जिस तरह गुड फ्राइडे के पहले ईसाइयों में 40 दिन के उपवास चलते हैं और जिस तरह इस्लाम में रमजान माह में रोजे (उपवास) रखे ...
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व्रत रखने के नियम दुनिया को हिंदू धर्म की देन है। व्रत रखना एक पवित्र कर्म है और यदि इसे नियम पूर्वक नहीं किया जाता है ...
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आयुर्वेद शास्त्र के अनुसार मनुष्य की आयु लगभग 120 वर्ष बताई गई है लेकिन वह अपने योगबल, संयमित आहार और विहास के बल से ...
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संध्यावंदन, योग, ध्यान, तंत्र, ज्ञान, कर्म के अलावा भक्ति भी मुक्ति का एक मार्ग है। भक्ति भी कई प्रकार ही होती है। ...
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शास्त्रों के अनुसार विवाह आठ प्रकार के होते हैं। विवाह के ये प्रकार हैं- ब्रह्म, दैव, आर्श, प्राजापत्य, असुर, गन्धर्व, ...
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गरुड़ पुराण के बारे में सभी जानते होंगे। ऐसा नहीं है कि गरुड़ पुराण में सिर्फ डराने या नरर्क की ही बाते हैं। किसी के ...
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वैज्ञानिक कहते हैं कि करीब बीस करोड़ साल पहले धरती पर पहला फूल उगा होगा। वर्तमान में फूलों की लगभग साढ़े तीन लाख ...
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गरुड़ पुराण के अनुसार, उक्त सभी कार्यों को करने की विशेष रीति और नियम होते हैं। रीति और नियम से किए गए कार्य से ही ...
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ऐसा नहीं है कि व्रत करने से शरीर और मन ही शुद्ध होता है। व्रत से संकल्प और आत्मविश्वास बढ़ता है, देवताओं की कृपा बरसने ...
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हिन्दू धर्म में एकादशी को विष्णु से तो प्रदोष को शिव से जोड़ा गया है। हालांकि ऐसा जरूरी नहीं है। आपका ईष्‍ट कोई भी आप ...
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प्राचीन नियमों के अनुसार सहवास से वंशवृद्धि, मैत्रीलाभ, साहचर्य सुख, मानसिक रूप से परिपक्वता, दीर्घायु, शारीरिक और ...
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मल-मूत्र विसर्जन के पूर्व जनेऊ को कानों पर कस कर दो बार लपेटना पड़ता है। मान्यता है कि इससे कान के पीछे की दो नसें...
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हिन्दू समाज के हर वर्ग और स्त्रियों को जनेऊ धारण करना चाहिए। लोग जनेऊ धारण इसलिए नहीं करते क्योंकि फिर उन्हें उसके ...
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हिन्दू पंचांग में मुख्य 5 बातों का ध्यान रखा जाता है। इन पांचों के आधार पर ही कैलेंडर विकसित होता है। ये 5 बातें हैं- ...
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हिन्दू पंचांग में मुख्य 5 बातों का ध्यान रखा जाता है। इन पांचों के आधार पर ही कैलेंडर विकसित होता है। ये 5 बातें हैं- ...
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मुहूर्त को लेकर मुहूर्त मार्तण्ड, मुहूर्त गणपति, मुहूर्त चिंतामणि, मुहूर्त पारिजात, धर्म सिंधु, निर्णय सिंधु आदि ...
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