क्या श्रीकृष्ण मनचले थे, जानिए 'ब्रह्मचारी' कृष्ण के अनोखे सत्य...

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Last Updated: सोमवार, 3 अप्रैल 2017 (15:47 IST)
योगी की एंटी रोमियो स्क्वाड का नाम एंटी कृष्ण स्क्वाड होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ और आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता प्रशांत भूषण ने इस तरह का बयान देकर एक नए विवाद को जन्म दे दिया। उन्होंने योगेश्वर कृष्ण को छेड़बाज भी कहा है। आखिर क्या है कृष्ण की हकीकत? इस आलेख को पढ़कर आप स्वयं तय करें। हां, पढ़ने के बाद अपनी प्रतिक्रिया देना न भूलें....
आर्यभट्‍ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ईपू में हुआ। इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात ने देह छोड़ दी थी तभी से कलियुग का आरंभ माना जाता है। उनकी मृत्यु एक बहेलिए का तीर लगने से हुई थी। तब उनकी उम्र 119 वर्ष थी। नवीनतम शोधानुसार 91 वर्ष।

कहते हैं कि भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियां थीं। क्या यह सही है? इस संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं और लोगों में इसको लेकर जिज्ञासा भी है। यह भी कि क्या कृष्ण ने रासलीला रचायी थी, क्या वे पनघट पर गोपियों को छेड़ते थे? आइए, जानते हैं कि कृष्ण रासलीला और उनकी 16,108 या 16 हजार पत्नियां होने के पीछे का सच क्या है।
जब कृष्ण का जन्म हुआ तो जेल से उनके पिता वसुदेव उन्हें मथुरा के ही पास यमुना पार के गांव गोगुल छोड़ आए थे। उस वक्त गोकुल में नंदगोप की पत्नी यशोदा को एक पुत्री हुई थी जिसे लेकर वे पुन: मथुरा की जेल में आ गए थे। गोकुल में उनके मित्र नंदगोप के यहां उनका पालन पोषण माता यशोदा ने किया।

गोकुल से को नंदगांव ले गए। गोकुल मां यशोदा का मायका था और नंदगांव में उनका ससुराल। नंद मथुरा के आसपास गोकुल और नंदगांव में रहने वाले आभीर गोपों के मुखिया थे। यहीं पर वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी ने बलराम को जन्म दिया था। मथुरा से गोकुल की दूरी महज 12 किलोमीटर है।
वृंदावन आगमन : नंदगांव में कंस के खतरे के चलते ही नंदबाबा दोनों भाइयों को वहां से दूसरे गांव वृंदावन लेकर चले गए। वृंदावन कृष्ण की बाल लीलाओं का प्रमुख स्थान है। वृंदावन मथुरा से 14 किलोमीटर दूर है। श्रीमद्भागवत और विष्णु पुराण के अनुसार कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंदजी कुटुंबियों और सजातियों के साथ नंदगांव से वृंदावन में आकर बस गए थे, जहां बरसाने के लोग भी थे।
यहीं पर कदंब वन में बलराम के साथ मिलकर उन्होंने कालिया नाग का वध किया था। तब उनकी उम्र सात या आठ वर्ष रही होगी। धनुक, यमलार्जुन, शकटासुर वध, प्रलंब वध और अरिष्ट आदि का वध करने के कारण उनकी ख्याति मथुरा पार चली गई थी। ऐसे में कंस का खतरा उनके उपर और भी मंडराने लगा था।

रासलीला का सच : मान्यता है कि यहीं पर वृंदावन में श्रीकृष्‍ण और राधा एक घाट पर युगल स्नान करते थे। इससे पहले कृष्ण की राधा से मुलाकात गोकुल के पास संकेत तीर्थ पर हुई थी। इसके बाद अंतिम मुलाकात उनकी द्वारिका में हुई थी। वृंदावन में ही श्रीकृष्ण और गोपियां आंख-मिचौनी का खेल खेलते थे। यहीं पर श्रीकृष्ण और उनके सभी सखा और सखियां मिलकर रासलीला अर्थात होली आदि तीज-त्योहारों पर नृत्य-उत्सव का आयोजन करते थे। यहां पर यमुना घाट के प्रत्येक घाट से भगवान कृष्ण की कथा जुड़ी हुई है। उस वक्त कृष्ण 7 साल के थे और राधे 12 की, उनके साथ उन्हीं की उम्र के बच्चों की एक बड़ी टोली रहा करती थी जो गांव की गलियों में धमाचौकड़ी मचाया करते थे। बच्चों इस धमाचौकड़ी को पुराणों और बाद में भक्तिकाल के कवियों ने रासलीला में बदल दिया।
गोवर्धन पर्वत : वृंदावन के पास ही गोवर्धन पर्वत है। यहीं पर कृष्ण ने लोगों को इंद्र के प्रकोप से बचाया था। उस काल में लोग इंद्र से डरकर उसकी पूजा करते थे। कृष्ण ने उनके इस डर को बाहर निकाला और सिर्फ परमेश्वर के प्रति ही प्रार्थना करने की शिक्षा दी। नंद इन्द्र की पूजा का उत्सव मनाया करते थे। श्रीकृष्ण ने इसे बंद करके कार्तिक मास में अन्नकूट का उत्सव आंरभ कराया।

कंस का वध : कंस को जब पता यह पता चला कि गोपाल नाम का यह बालक वसुदेव और देवकी का पुत्र ही है तो उसने बलराम और कृष्ण को धोके से मारने के लिए पहलवानी के लिए निमंत्रण दिया, क्योंकि कंस चाहता था कि इन्हें पहलवानों के हाथों मरवा दिया जाए, लेकिन दोनों भाइयों ने पहलवानों के शिरोमणि चाणूर और मुष्टिक को मारकर कंस को पकड़ लिया और सबके देखते-देखते ही उसको भी मार दिया। कहते हैं कि श्रीकृष्ण की उम्र उस वक्त महज 11 वर्ष से थोड़ी ही ज्यादा थी। कंस का वध करने के बाद भगवान कृष्ण का जीवन बदल गया था। इसके बाद जीवन पर्यंत उन्हें सिर्फ युद्ध युद्ध और युद्ध ही करना पड़ा।
अब सवाल यह उठता है कि 11 वर्ष की उम्र तक कंस से बचाने के लिए श्रीकृष्ण को नंदबाबा एक गांव से दूसरे गांव भगाते और छुपाते रहे तो फिर ऐसे में मात्र दो तीन वर्ष ही वृंदावन में बिताए काल को किस तरह कविओं और पुराणकारों ने बढ़ा-चढ़ाकर उसे गोपियों के साथ महारासलीला में बदल दिया?

कंस का वध करने के पश्चात कृष्ण और बलदेव ने कंस के पिता उग्रसेन को पुन: राजा बना दिया। उग्रसेन के 9 पुत्र थे, उनमें कंस ज्येष्ठ था। उनके नाम हैं- न्यग्रोध, सुनामा, कंक, शंकु अजभू, राष्ट्रपाल, युद्धमुष्टि और सुमुष्टिद। उनके कंसा, कंसवती, सतन्तू, राष्ट्रपाली और कंका नाम की 5 बहनें थीं। अपनी संतानों सहित उग्रसेनकुकुर-वंश में उत्पन्न हुए कहे जाते हैं और उन्होंने व्रजनाभ के शासन संभालने के पूर्व तक राज किया।

कृष्ण बचपन में ही कई आकस्मिक दुर्घटनाओं का सामना करने तथा किशोरावस्था में कंस के षड्यंत्रों को विफल करने के कारण बहुत लोकप्रिय हो गए थे। कंस के वध के बाद उनका अज्ञातवास भी समाप्त हुआ और उनके सहित राज्य का भय भी। तब उनके पिता और पालक ने दोनों भाइयों की शिक्षा और दीक्षा का इंतजाम किया। लेकिन श्रीकृष्ण के सामने तुरंत ही एक नया खतरा पैदा हो गया था और वह था मगथ साम्राज्य के महाक्रूर सम्राट जरासंध का जो कंस का ससुर था। उसने कृष्ण का वध करने की शपथ ले रखी थी। जिन्होंने वी सावंत की युगांधर और वेद व्यास का महाभारत पढ़ा है वे जानते हैं कि कृष्ण के पास इतनी फुरसत नहीं थी कि वे रासलीला रचाने जाते।
अब सवाल यह उठता है कि जब 11 वर्ष की अवस्था में श्रीकृष्ण मथुरा चले गए थे, तो इतनी लघु अवस्था में गोपियों के साथ प्रेम या रास की कल्पना कैसे की जा सकती है? मथुरा में उन्होंने कंस से लोहा लिया और कंस का अंत करने के बाद तो जरासंध उनकी जान का दुश्मन बन गया था जो शक्तिशाली मगथ का सम्राट था और जिसे कई जनपदों का सहयोग था। उससे दुश्मनी के चलते श्रीकृष्ण को कई वर्षों तक तो भागते रहना पड़ा था। जब परशुराम ने उनको सुदर्शन चक्र दिया तब जाकर कहीं आराम मिला।


अगले पन्ने पर श्रीकृष्ण की आठ पत्नियों का राज...

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