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दुर्योधन और उसके भाई इस राक्षस के थे अंश

अनिरुद्ध जोशी|
के योद्धा किसके पुत्र या अवतार थे? महाबली बलराम शेषनाग के अंश थे। आठ वसुओं में से एक 'द्यु' नामक वसु ने ही भीष्म के रूप में जन्म लिया था। देवगुरु बृहस्पति ने ही द्रोणाचार्य के रूप में जन्म लिया था। गुरु द्रोणाचार्य के अश्‍वत्थामा को महादेव, यम, काल और क्रोध के सम्मिलित अंश से उत्पन्न किया गया था। देवताओं में सबसे प्रमुख सूर्यदेव के पुत्र कर्ण थे। कर्ण सूर्य के अंशावतार थे।

इसी क्रम में कहते हैं कि का अंश था तो उसके 100 भाई के राक्षस के अंश से थे। वायु पुराण (70.51.65) में राक्षसों को पुलह, पुलस्त्य, कश्यप एवं अगस्त्य ऋषि की संतान माना गया है।

अर्जुन के धर्मपिता पांडु थे, लेकिन असल में वे इन्द्र-कुंती के पुत्र थे। भीम को पवनपुत्र कहा जाता है। हनुमानजी भी पवनपुत्र ही थे। युधिष्ठिर धर्मराज-कुंती के पुत्र थे। युधिष्ठिर के धर्मपिता पांडु थे और वे 5 पांडवों में से सबसे बड़े भाई थे। नकुल और सहदेव 33 देवताओं में से 2 अश्विनीकुमारों के अंश से उत्पन्न हुए थे। ये दो अश्‍विनी कुमार थे- 1. नासत्य और 2. दस्त्र।

रुद्र के एक गण ने कृपाचार्य के रूप में अवतार लिया। द्वापर युग के अंश से शकुनि का जन्म हुआ। अरिष्टा के पुत्र हंस नामक गंधर्व धृतराष्ट्र तथा उसका छोटा भाई पाण्डु के रूप में जन्मे। सूर्य के अंश धर्म ही विदुर के नाम से प्रसिद्ध हुए। कुंती और माद्री के रूप में सिद्धि और धृतिका का जन्म हुआ था। मति का जन्म राजा सुबल की पुत्री गांधारी के रूप में हुआ था। राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मणी के रूप में लक्ष्मीजी व द्रौपदी के रूप में इंद्राणी उत्पन्न हुई थीं। अभिमन्यु चंद्रमा के पुत्र वर्चा का अंश था।

मरुतगण के अंश से सात्यकि, द्रुपद, कृतवर्मा व विराट का जन्म हुआ था। अग्नि के अंश से धृष्टधुम्न व राक्षस के अंश से शिखंडी का जन्म हुआ था। विश्वदेवगण द्रौपदी के पांचों पुत्र प्रतिविन्ध्य, सुतसोम, श्रुतकीर्ति, शतानीक और श्रुतसेव के रूप में पैदा हुए थे।
दानवराज विप्रचित्ति जरासंध व हिरण्यकशिपु शिशुपाल का अंश था। कालनेमि दैत्य ने ही कंस का रूप धारण किया था।
इंद्र की आज्ञानुसार अप्सराओं के अंश से 16 हजार स्त्रियां उत्पन्न हुई थीं।

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