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हिंदी ब्‍लॉग : वर्तमान और भविष्‍य
जाने-माने ब्‍लॉगर समीर लाल से वेबदुनिया की बातचीत
मनीषा पांडेय

आपनब्‍लॉशुरुआकैसकीहिंदमेब्‍लॉशुरकरनख्‍याकैसआया

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ब्लॉएवं इन्टरनेट पर लेखन तो काफी सालों सचल रहथा, मगअँग्रेजमें ही हुआ करता थऔर वह भतकनीकमसलोही। फिवर्ष 2005 मेकवितलिखनशौजागई-कवितयाहग्रुसदस्बनहिन्दयूनीकोमेलिखनबारहमाध्यसीखा. वहीहिन्दब्लॉविषमेजानसन् 2005 मार्मेशौकियलिखनशुरदिया, अपनब्लॉउड़तश्तरपर। तलगाताउड़तश्तरइन्टरनेअपनउडारहै.

आपककौन-कौब्‍लॉहैं

हिन्दमेमेरमात्ब्लॉहै, जिसकनाउड़तश्तरै. हाँ, अग्रेजमेएक्सेकभी-कभालिखतहूमगज्यादपर्सननोट्हैं.

ब्‍लॉलिखतहुक्‍या आकिन्‍हीखाविषयोलिखतहैंअपनविषयोचुनाकितरकरतहैं

मैविषविधमेलिखतहूँ। कविता, कहानी, व्यंग्सभीविषअपनआसपापकमेआतरहतहैंअधिकतर चारों ओरहघटनाओविषयवस्तबनातहूँ। चुनाकरनज्यादबचाध्यारखतहूँ। मेरी यही कोशिहोति ऐसकिसविषर न लिखूँ, जविवादास्पसकतहैकिसव्यक्तिगरूदुखसकतहैं। अन्यथव्यंग्कहानमाध्यजैसविषदिजाए, बोलचाभाषमेलिखनपसंकरतहूँ

आपकपसंदीदहिंदब्‍लॉकौन-हैं

बहुतेरे। एनालेनशायसंभनहीं। सारपसंदीदअपनमेअनोखअद्भुहैं.

वर्तमामेहिंदब्‍लॉगिंस्थिति ै, उसकबारमेआपकक्‍यख्‍याहै

अभशुरुआतदौगुजरहहै। एछोटा-ससमाहै। लोएक-दूसरजाननलगहैं। परस्पव्यक्तिगसंबंस्थापिरहहैं। बामेशायवालआयाम न रहे। रोलोग आ रहहैंसमुदाबढ़तरहहैकभकभाथोड़े-बहुविवाजातहैं, मगजल्जातहैं। मैहिन्दब्लॉगिंसुनहरभविष्लियपूर्णतआशान्वित हूँ

माध्‍यरूमेब्‍लॉअन्‍माध्‍यमों ( टीवप्रिंट ) सकितरअलहै

इसऐसमालेि जैसआपनसोचा, वैसआपनलिखब्लॉमाध्यआपनसुनदिया। हालाँकि अभसुननवालहैं, मगऐसमाध्यहै, जआपकबाबिनकिससंपादकीअन्काट-छाँत्वरिपाठकोपहुँचदेतआपकउनसटिप्पणमाध्यसंवास्थापिकरनमौकदेतै.
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