दो मौलिक कविताएं : लोग


(एक)
 
आंसू याद रख खुशियां भुला देते हैं,
आंखों में बसा लेते हैं लोग।
 
फूल की महक लेकर भुला देते हैं,
कांटों को दामन से लगा लेते हैं लोग।
 
बातों-बातों में मुर्दे गड़े उखाड़ लेते हैं,
जीवन को कब्रिस्तान बना लेते हैं लोग।
 
एक ही बात बार-बार दोहराते हैं,
कुछ किस्से क्यों नहीं भुला देते हैं लोग।
 
दर्द के गीत ही लिखते हैं, गुनगुनाते हैं,
दिल को गमों का जहान बना लेते हैं लोग।
 

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