दिल का हाल बयां करती कविता : धड़कन...


जुबां नहीं होती दिल का हाल
कैसे बयां करतीं तेरी नजदीकियां।
बहारों से पूछता बिन हवाओं
कौन रखता खुशबू का हिसाब
नादां भौंरे नादां
गुंजन कर किसका दे रहे संकेत।

कहीं तुम तो नहीं निकल रही
आम के मौर और टेसू के फूल
झांक रहे टहनियों की खिड़कियों से।

लगता ला रहा
तुम्हारे आने का पैगाम
की जुबां भी गुनगुनाने लगी
इस में हर दिल की धड़कनें
बयां करती हैं तेरी नजदीकियां।

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